अयोध्या। छह माह से मेडिकल कॉलेज दर्शननगर में लगी सीटी स्कैन मशीन की राह का रोड़ा अब दूर हो गया है।
सभी प्रक्रियाएं पूर्ण करने के बाद अंतत: भारत सरकार की महत्वपूर्ण संस्था परमाणु ऊर्जा नियामक परिषद (एईआरबी) की ओर से इसे चलाने की अनुमति प्रदान की गई है।
जिससे पखवारे भर में ही इस मशीन के संचालन का दावा जिम्मेदार कर रहे हैं। ये सीटी स्कैन मशीन जिले ही नहीं अपितु मंडल भर के गंभीर मरीजों के लिए वरदान साबित होगी।
मालूम हो कि जिला अस्पताल में स्थापित मंडल की एकमात्र सीटी स्कैन मशीन लंबे समय से खराब है। इसकी मरम्मत नहीं हो पाने की दशा में करीब ढाई करोड़ रुपये की लागत से एक नई सीटी स्कैन मशीन राज्य सरकार की ओर से करीब छह माह पूर्व जिले के लिए आवंटित की गई।
दर्शननगर स्थित मेडिकल कॉलेज (पहले संयुक्त मंडलीय चिकित्सालय) में मशीन भेजकर स्थापित करा दी गई। मगर नियमत: जिस मशीन से रेडिएशन होता है, उसे बिना भारत सरकार की महत्वपूर्ण इकाई परमाणु ऊर्जा नियामक परिषद से लाइसेंस प्राप्त किए नहीं चलाया जा सकता।
छह माह लंबी प्रक्रिया के बाद परमाणु ऊर्जा नियामक परिषद से सीटी स्कैन मशीन चलाने का लाइसेंस प्राप्त हो गया है। जिसके बाद अब मेडिकल कॉलेज प्रशासन व एचएलएल के अधिकारियों के बीच हुई वार्ता में इसे शीघ्र संचालित करने की तैयारी की जा रही है।
सीटी स्कैन परियोजना के प्रदेश प्रभारी संतोष शुक्ल ने बताया कि परमाणु ऊर्जा नियामक परिषद से अनुमति मिलने के बाद बमुश्किल 15-20 दिन में मशीन का संचालन शुरू करा दिया जाएगा।
इस मशीन से सुबह आठ बजे से सायं छह बजे तक जांच होगी। इसके अतिरिक्त इमरजेंसी में सेवाएं भी दी जाएंगी।
24 घंटे सेवा देने के लिए कर्मचारियों की शिफ्ट में तैनाती की जाएगी। जांच के एवज में मरीजों से शुल्क नहीं लिया जाएगा।
बताया कि मशीन को पीपीपी मॉडल पर एचएलएल कंपनी द्वारा संचालित किया जाएगा। मौजूदा समय में इंटरनेट, बिजली, कर्मचारियों की तैनाती सहित तमाम अंदरूनी तैयारियों को तेजी से अंतिम रूप दिया जा रहा है।
जिला अस्पताल में स्थापित एकमात्र सीटी स्कैन मशीन करीब दो साल से ठप है। यहां पूरे अयोध्या मंडल के मरीजों की जांच होती थी।
मौजूदा समय में निजी सेंटरों पर सीटी स्कैन जांच कराने पर मरीजों के करीब चार हजार रुपये तक खर्च होते हैं। साथ ही सरकारी अस्पताल में सीटी स्कैन की जांच न होने से हेड इंजरी सहित गंभीर मामलों में लोगों को समय पर इलाज न मिलने से जान तक गंवानी पड़ रही है। ऐसे में ये मशीन जिले के लोगों के साथ ही नजदीकी जिले के लोगों के लिए भी वरदान साबित होगी।
मेडिकल कॉलेज अयोध्या के प्राचार्य प्रो. विजय कुमार ने बताया कि तमाम प्रक्रियाओं को पूर्ण करने के बाद अंतत: परमाणु ऊर्जा नियामक परिषद से लाइसेंस प्राप्त हो गया है।
एचएलएल कंपनी की ओर से पीपीपी मॉडल पर शीघ्र इस मशीन को संचालित किया जाएगा। इससे मरीजों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी।