तीन दिन से सीबीआई टीम पीएचसी व सीएचसी पर जननी सुरक्षा योजना (जेएसवाई) घोटाले का दस्तावेज खंगाल रही है। सीबीआई के अफसरों ने शुक्रवार को मसौधा पीएचसी का दस्तावेज तलब किया और दर्शननगर स्थित सीएमओ कार्यालय में ही इसे खंगाला है।
एएनएम से भी उनके क्षेत्र में प्रसूताओं के हुए प्रसव का विवरण तलब किया है। सूत्रों की माने तो जिला मुख्यालय से सीबीआई को जो रिपोर्ट सौंपी गई है वह सीएचसी और एएनएम सेंटर स्तर पर डिफर कर जा रही है। अधिकारियों ने एएनएम से लिस्ट लेकर जब गांव की हकीकत परखी तो सब कुछ सामने आ जा रहा है।
सीबीआई की जांच से गांव से लेकर शहर तक के स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के चेहरे की हवाईयां उड़ी हुई हैं। एक-एक गांव में 30 से प्रसव करा दिया गया है, जबकि जन्म दर के आंकड़े बताते हैं कि एक हजार की आबादी में एक वर्ष में अधिकतम पांच से सात प्रसूताएं ही होगी।
पिछले तीन दिन से पीएचसी से लेकर गांव तक जांच कर रही सीबीआई के अधिकारियों को अहम साक्ष्य हाथ लगे हैं। पीएचसी/सीएचसी पर जिन प्रसूताओं ने बच्चा जना है, उसके अलावा अस्पताल के सरकारी रजिस्टर में ऐसी प्रसूताओं ने नवजात शिशुओं को जन्म दिया है जो उस क्षेत्र के गांव में है ही नहीं।
महिला अस्पताल में प्रसव के लिए जो महिलाएं आईं उन्हें जेएसवाई का धन दिया गया। जिस पीएचसी क्षेत्र में वह रहती है उस क्षेत्र की एएनएम ने भी उसी प्रसूता के नाम से जेएसवाई का धन निकाल लिया है।
एएनएम स्तर से की गई जेएसवाई के धन की हेराफेरी में उस क्षेत्र के अधीक्षक और लिपिक की भी सहभागिता है। और तो और वर्ष 2011 में शहरी क्षेत्र कौशलपुरी की रहने वाली महिलाओं का प्रसव दर्शननगर उपकेंद्र पर ही होना दर्शाया गया है। जेएसवाई के घोटाले में पूरा बाजार और तारुन सीएचसी पर बड़े पैमाने पर भी अनियमितता बरती गई है।