अधिवक्ताओं ने गुरुवार सुबह अचानक शहर के भीतर आने वाले हाईवे डिवाइडर तक बाइकें व कारें खड़ी करके वाहन पार्किंग बना डाली। इससे रोडवेज से निकलने वाली दर्जनों बसें फंस गईं। लखनऊ, गोरखपुर, आजमगढ़, इलाहाबाद, रायबरेली आदि रूटों को यात्री घंटों परेशान रहे।
प्रशासन भारी फोर्स के साथ मामले को हल करने की कोशिश की, लेकिन अधिवक्ताओं ने विवादित बंगले को पार्किंग के लिए देने और उसे ढहाने के फर्जी मुकदमे से वकीलों को बरी करने की मांग पूरी होने तक हाईवे को ही पार्किंग के रूप में रोजाना उपयोग करने की चेतावनी दे दी।
मामला न बिगड़े इसलिए प्रशासन ने सूझबूझ सीवी टावर चौराहे और कमिश्नर आवास के सामने की ओर से वैकल्पिक रास्ता निकाल यातायात शुरू कराया। बार एसोसिएशन अध्यक्ष कालिका प्रसाद मिश्र के नेतृत्व में गुरुवार सुबह कचहरी खुलते ही अधिवक्ताओं ने राष्ट्रीय राजमार्ग का दक्षिणी छोर डिवाइडर तक वाहन खड़ा करके जाम कर दिया।
बार एसोसिएशन अपनी तीन मांगों वकीलों के खिलाफ दर्ज मुकदमा वापस लिए जाने, दोषी अफसरों के खिलाफ एफआईआर दर्ज किए जाने और वाहन स्टैंड के लिए जमीन मुहैया कराए जाने को लेकर एकजुट नजर आया। सभी वकीलों ने राष्टीय राजमार्ग पर अपने-अपने वाहन खड़ा कर दिए, जिससे मार्ग का दक्षिणी सिरा ठप हो गया।
इसके बाद प्रशासन ने रोडवेज से सीधे निकल रहे वाहनों को जैसे-तैसे टीवी टावर चौराहे और कमिश्नर आवास के सामने से कचहरी जाने वाले वाहनों का रूट बदल दिया। दोपहर बाद छोटे वाहनों को इधर से जाने की छूट दी गई। लेकिन वे भी आधे जाम के कारण डिवाइडर के दूसरे साइड से निकल पा रहे थे।
इससे भी जाम की समस्या रही। सुरक्षा के लिए पुलिस व पीएसी के जवान काफी संख्या में लगाए गए थे। मार्ग पर वाहन खड़ा करने के बाद वकीलों ने संघ भवन के समक्ष धरना दिया और प्रशासन विरोधी नारे लगाए।