नाबालिग किशोरी से गैंगरेप हुआ। चार लोगों के खिलाफ रिपोर्ट लिखाई गई। दो पर गैंगरेप के बाद गर्भपात करवाने का आरोप था। विवेचना थानाध्यक्ष तारुन कृष्ण कुमार गुप्त ने की।
केस डायरी के 10 पर्चों तक दोनों पर आरोप बनता भी दिखाया लेकिन केवल एक आरोपी के खिलाफ आरोपपत्र भेज मामले की इतिश्री कर दी। दूसरे को क्लीन चिट देते हुए आरोपपत्र कोर्ट भेज दिया।
मामला विशेष न्यायाधीश पाक्सो एक्ट अजय कुमार श्रीवास्तव की कोर्ट में विचाराधीन है। बृहस्पतिवार को इसमें आरोपी पर आरोप तय होना था।
आरोपपत्र में विवेचक की करतूत देख इसे गंभीरता से लेते हुए उसे स्पष्टीकरण के लिए कोर्ट ने तलब किया है। कोर्ट में उपस्थित न होने पर मामला हाईकोर्ट को भी संदर्भित किया जा सकता है।
अगली पेशी 22 दिसंबर नियत की गई है। मामला तारुन थाने के एक गांव का है। यहां की रहने वाली किशोरी गांव में अपने दूसरे घर जानवरों को चारा देने जा रही थी।
रास्ते में पहले से घात लगाए बैठे गांव के ही रामभवन उर्फ मुखिया उसे पकड़ पास के बाग में ले गए और उसके साथ रेप किए। धमकी दी कि कहीं शिकायत करोगी तो पूरे परिवार को खत्म कर देंगे।
इस घटना के 45 दिन बाद मुखिया के सगे भाई लालजी ने भी किशोरी के साथ दुष्कर्म किया। पांच माह तक दोनों बारी-बारी दुष्कर्म करते रहे। वह गर्भवती हो गई तो उसका गर्भपात करवाने के लिए दवा खिलाई।
इस पर पोल खुला तब पीड़िता के भाई ने दोनों भाइयों के खिलाफ गैंगरेप व दो अन्य के खिलाफ धमकी देने की रिपोर्ट दर्ज कराई।
इसके बाद विवेचक ने विवेचना में केवल लालजी के खिलाफ आरोपपत्र भेज अन्य को क्लीन चिट दे दी। मामला कोर्ट पहुंचा तो जज ने इसे गंभीरता से लेते हुए मामले में स्पष्टीकरण के लिए विवेचक को तलब किया है।