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1.59 करोड़ से बेसिक स्कूलों में हुई फर्नीचर खरीद में धांधली

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1.59 करोड़ से बेसिक स्कूलों में हुई फर्नीचर खरीद में धांधली
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अयोध्या। जिले के उच्च प्राथमिक विद्यालयों में 1.59 करोड़ से खरीदे गए फर्नीचर के मामले की जांच में भारी अनियमितता सामने आई है। डीएम डॉ. अनिल कुमार ने आठ सदस्यीय कमेटी से जांच कराई तो फर्नीचर में प्रति बेंच 12 किग्रा लोहा कम पाया गया है।

फर्नीचर में लोहे के एंगल के बजाय पाइप लगाया गया है। जबकि खरीद से पहले ही बेंच का मॉडल तय किया गया था। मामले में शिक्षा विभाग ने शासन से कार्यवाही के लिए गाइड लाइन मांगी है।
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इस मुद्दे को ‘अमर उजाला’ ने 29 जुलाई 2018 को माई सिटी के पेज 4 पर उजागर किया था। इसके बाद जिलाधिकारी ने जांच के निर्देश दिए थे।

जिले के लगभग 350 जूनियर हाईस्कूलों में से 149 स्कूलों के लगभग 78 सौ बच्चों को बैठने के लिए फर्नीचर की खरीद होनी थी। प्रदेश सरकार ने अनुमति के साथ बेसिक शिक्षा विभाग को 4460 रुपये प्रति फर्नीचर के हिसाब से एक करोड़ 69 लाख रुपये आवंटित किए।

विभाग ने फर्नीचरों का टेंडर निकाला तो लगभग 39 सौ रुपये प्रति फर्नीचर के हिसाब से लगभग एक करोड़ 59 लाख रुपये में स्वीकृत किया। फर्म ने फर्नीचर की आपूर्ति के लिए मॉडल बेसिक शिक्षा विभाग को सौंपा था, जो अब भी विभाग में रखा गया है।

जिले के मसौधा, पूरा व सोहावल ब्लॉक के स्कूलों में फर्म ने फर्नीचरों की आपूर्ति कर दी, लेकिन विभाग ने इसका सत्यापन तक नहीं कराया। आपूर्ति किए जा रहे फर्नीचर मानक पर हैं या अधोमानक, यह जानने की विभाग ने कोशिश नहीं की।

जबकि फर्म ने ड्राइंग में दिए गए मानक के विपरीत इन ब्लॉकों में फर्नीचर की आपूर्ति कर दी। इनमें एंगल की जगह पाइप का इस्तेमाल किया। ‘अमर उजाला’ ने 29 जुलाई को मामले को प्रमुखता से प्रकाशित किया था।

इसके बाद जिलाधिकारी के निर्देश पर फर्नीचर की आपूर्ति व भुगतान रोकते हुए आठ सदस्यीय टीम गठित करके मामले की जांच कराई। आरईएस के सहायक अभियंता राजेश कुमार, तहसीलदार सदर संजय सिंह, नगर शिक्षा अधिकारी संजय कुमार गुप्ता, आपूर्ति किए गए ब्लॉकों के खंड शिक्षा अधिकारी सहित आठ अधिकारियों की टीम ने अपनी रिपोर्ट जिलाधिकारी को प्रेषित की है।

सहायक अभियंता राजेश कुमार ने बताया कि दिए गए मॉडल के फर्नीचर में एंगल की जगह पाइप का प्रयोग किया गया है। इसमें प्रति फर्नीचर करीब 12 किलोग्राम लोहा कम लगाया गया है।

बताया कि एंगल के बजाय पाइप पर बनाए गए फर्नीचर की मजबूती कम होती है। साथ ही इसका लागत मूल्य भी घट जाता है। बताया कि जिस मॉडल के फर्नीचर की आपूर्ति के लिए टेंडर दिया गया था, उसकी आपूर्ति फर्म ने नहीं की है।

इसलिए आपूर्ति किए गए फर्नीचर के लागत मूल्य निर्धारित करने का प्रश्न ही नहीं उठता है। अब, जांच रिपोर्ट प्राप्त होने के उपरांत अग्रिम कार्रवाई के लिए बेसिक शिक्षा विभाग ने शासन से दिशा-निर्देश मांगा है।

जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, अयोध्या अमिता सिंह ने बताया कि जिले के चार ब्लॉकों में मानक के विपरीत फर्नीचर की आपूर्ति की गई थी। आठ सदस्यीय टीम ने जांच कर अपनी रिपोर्ट प्रेषित की है।
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जब फर्म ने वांछित फर्नीचर की आपूर्ति नहीं की तो भुगतान में कटौती का औचित्य नहीं है। इसलिए अग्रिम कार्यवाही के लिए शासन से गाइड लाइन मांगी गई है। फर्म का भुगतान व फर्नीचर की आपूर्ति रोक दी गई है।
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