अयोध्या। ग्रामीण अभियंत्रण विभाग के अधिशासी अभियंता, अवर अभियंता समेत पूर्व परियोजना निदेशक के खिलाफ शहर कोतवाली में केस दर्ज होगा। यह आदेश मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट डॉ. सुनील कुमार सिंह ने दिए हैं। आरईएस विभाग में समय-समय सांसद व विधायक निधि से जारी धनराशि के गबन का आरोप है।
अयोध्या के बड़ी छावनी रायगंज निवासी चंद्रशेखर शुक्ला ने अदालत में अर्जी देकर आरोप लगाया था कि ग्रामीण अभियंत्रण विभाग में विकास योजनाएं शासन द्वारा समय-समय पर स्वीकृत की गईं। जिसकी धनराशि आवंटित कर संबंधित कार्यदायी संस्था को प्रदान की गई, लेकिन यह धनराशि सभी ने मिलकर विकास योजनाओं को पूर्ण कराए बगैर ही गबन कर लिया है।
हैरिंग्टनगंज के बुढ़नपुर मेहदौना ग्राम सभा में आईएसएमबीडी विद्यालय परिसर संपर्क मार्ग के निर्माण के लिए 5 लाख 69 हजार रुपये शासन द्वारा अवमुक्त हुए, लेकिन बगैर निर्माण कार्य पूरा किए ही इसे गबन कर लिया गया। इस धनराशि की वसूली का आदेश जिलाधिकारी ने 30 दिसंबर 2017 को दिया है। सांसद प्रमोद तिवारी की अनुशंसा पर 3 लाख 88 हजार स्वीकृत हुआ। कार्यदायी संस्था ने कार्य पूर्ण कराए बगैर ही इस धनराशि का गबन कर लिया।
इसकी वसूली के आदेश तत्कालीन डीएम ने 15 मार्च 2018 को दिये थे। इसके अलावा विधायक निधि से 49 हजार, 5 लाख 68 हजार, 6 लाख 90 हजार व 2 लाख 75 हजार स्वीकृत हुए। ये रकम कार्यदायी संस्था को दी गई, लेकिन कार्य पूर्ण करवाए बगैर ही धनराशि गबन कर ली गई। कोर्ट में दी गई अर्जी पर मामले को एक बार परिवाद के रूप में दर्ज कर लिया गया। इस आदेश को चंद्रशेखर ने जिला जज की अदालत में चुनौती दी।
वहां से सीजेएम का आदेश निरस्त कर के मामले में फिर से सुनवाई कर आदेश पारित करने का आदेश हुआ। सीजेएम डॉक्टर सुनील कुमार सिंह की अदालत ने मामले में पुन: सुनवाई के बाद आरईएस के अधिशासी अभियंता हसनैन अहमद, अवर अभियंता नरेंद्र देव सिंह, सहायक अभियंता सैय्यद हैदर मेहंदी रिजवी, पूर्व परियोजना निदेशक अश्विनी कुमार मिश्रा, लिपिक राजमणि यादव के खिलाफ शहर कोतवाली में एफआईआर दर्ज कर विवेचना करने का आदेश हुआ है। कोर्ट ने विवेचना के परिणामों से अदालत को अवगत कराने का भी आदेश दिया है।