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पूर्व पुलिस अधीक्षक नगर अदालत में तलब, झूठी आख्या देने का मामला

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अयोध्या। पूर्व पुलिस अधीक्षक नगर अनिल सिंह सिसोदिया को आईजीआरएस पोर्टल पर मिथ्या जांच आख्या भेजना महंगा पड़ गया। अदालत ने उन्हें इस मामले में विचारण के लिए तलब किया है। यह आदेश मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत से हुआ है। मामले में अगली पेशी 28 जनवरी नियत की गई है।
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दर्शन नगर निवासी मुरलीधर चतुर्वेदी ने बताया कि जिलाधिकारी के जनता दर्शन व वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के आईजीआरएस पोर्टल पर जनता की शिकायत पर विपक्षी से सांठगांठ कर साक्ष्यों व वास्तविकता के विपरीत मिथ्या आख्या प्रेषित की जाती है। व्यवस्था है कि इस आख्या से आवेदक के संतुष्ट न होने पर फिर जांच होती है। वहीं पुरानी आख्या पोर्टल पर फिर जांच अधिकारी द्वारा फीड करा दी जाती है। इसी के आधार पर जिलाधिकारी अंतिम निर्णय लेते हैं और उनके द्वारा आख्या के आधार पर प्रकरणों को खत्म कर दिया जाता है। बताया कि उन्होंने 20 जून, 2018 को वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के यहां प्रार्थना पत्र देकर कार्रवाई की मांग की थी। एसएसपी ने मामले में कार्रवाई करने के लिए पुलिस अधीक्षक नगर को आदेश दिया था।
आरोप है कि तत्कालीन पुलिस अधीक्षक नगर ने अपने अधीनस्थ कर्मचारियों को बचाने के लिए आईजीआरएस मुख्यमंत्री पोर्टल पर वास्तविकता के विपरीत मिथ्या आख्या भेज दी। इस आख्या से संतुष्ट न होने पर आवेदक ने फिर जांच के लिए शिकायत की तो उसमें भी झूठी आख्या को फीड करा दिया गया। इसी के आधार पर मुरलीधर ने सीजेएम की अदालत में पुलिस अधीक्षक नगर पर एफआईआर दर्ज करने के लिए अर्जी दी थी। कोर्ट ने इस अर्जी को परिवाद के रूप में दर्ज करते हुए परिवादी का बयान दर्ज किया और फिर गवाह का बयान दर्ज करने के बाद मामले में पुलिस अधीक्षक नगर को प्रथम दृष्टया दोषी पाते हुए भारतीय दंड विधान की धारा 119, 166, 182, 217 व 418 के तहत विचारण के लिए तलब किया है।
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