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कोरोना पॉजिटिव की लखनऊ में मौत के बाद पत्नी सहित दस क्वारंटीन

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43-अयोध्या-गोसाईगंज के मानापुर गांव में तैनात पुलिस बल - फोटो : FAIZABAD
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गोसाईगंज। महाराष्ट्र से लौटे गोसाईगंज थाना क्षेत्र के मानापुर निवासी अधेड़ की लखनऊ में मौत के बाद कोरोना पॉजिटिव मिलने की सूचना के बाद क्षेत्र में हड़कंप मच गया। मृतक इंडिया गेट के पास फोटोग्राफी कर जीवन यापन करता था। बुधवार की देर रात ही मृतक की पत्नी सहित दस व्यक्तियों को तिरुपति होटल में क्वारंटीन किया गया है। गुरुवार को मृतक की पत्नी सहित 14 व्यक्तियों का कोरोना जांच के लिए नमूना भेजा गया है। इसी रिपोर्ट पर क्षेत्र की संवेदनशीलता टिकी हुई है, जिसका जनपद सहित क्षेत्रवासियों को बेसब्री से इंतजार है।
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महाराष्ट्र से पत्नी के साथ आ रहे गोसाईगंज थाना क्षेत्र के मानापुर निवासी अधेड़ की लखनऊ में ट्रेन में हीे मौत हो गई थी, जिसके शव का पोस्टमार्टम करने के बाद शव को परिजनों को सुपुर्द कर दिया गया। एंबुलेंस से शव गांव लाया गया, जिसे सीधे शमशान घाट तक पहुंचाया गया। लॉकडाउन के नियमों के तहत बुधवार को ही न्यूनतम लोगों के बीच अंतिम संस्कार भी कर दिया गया। उधर, मृतक की कोरोना रिपोर्ट लखनऊ में पॉजिटिव आने के बाद जिले में भी सतर्कता बढ़ गई है।
आनन-फानन में जिला प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव पहुंची और मृतक की पत्नी सहित परिवार के दस व्यक्तियों को शहर के सिविल लाइन स्थित तिरुपति फैसलिटी क्वारंटीन में रखा गया। मृतक के साथ यात्रा करने वाली उसकी पत्नी का नमूना कोरोना जांच के लिए बृहस्पतिवार की सुबह भेजा गया है। महिला की रिपोर्ट पर ही क्षेत्र की संवेदनशीलता टिकी हुई है।
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मुख्य चिकित्साधिकारी डॉप्त घनश्याम सिंह ने बताया कि मृतक की पत्नी की रिपोर्ट यदि पॉजिटिव आती है तो क्वारंटीन लोगों की संख्या बढ़ाई जाएगी। गांव व संपर्क में आने वाले प्रत्येक व्यक्ति की शिनाख्त करके सभी को क्वारंटीन किया जाएगा। सीएमओ ने बताया कि शव को एंबुलेंस से ही सीधे शमशान घाट ले जाया गया है। इससे संक्रमण फैलने की संभावना फिलहाल कम है। फिर भी एहतियात के तौर पर हर पहलू पर ध्याम दिया जा रहा है।
बीते 23 अप्रैल को निजी लैब की जांच के बाद पॉजिटिव मिली सनेथू गांव की महिला के निगेटिव आने के बाद जिले के ग्रीन जोन में प्रवेश करने की संभावना प्रबल हो गई थी। महिला के संक्रमित पाए जाने का 21 दिन लगभग बीत चुका है। जनपद वासियों को जिले के ग्रीन जोन में पहुंचने का इंतजार था। लेकिन लोगों की आस फीकी पड़ती जा रही है। जिले के लोगों की निगाहें अब मृतक की पत्नी की रिपोर्ट पर टिकी हैं।
जिले से बीते 11 मई को जिले से गए 14 लोगों की रिपोर्ट भी निगेटिव प्राप्त हुई है। इनमें चार नमूने मेडिकल कॉलेज दर्शननगर व दस नमूने मसौधा फैसलिटी क्वारंटीन से गए थे। इनमें दस व्यक्तियों को मसौधा से डिस्चार्ज करते हुए होम क्वारंटीन किया गया है। जबकि बृहस्पतिवार को मेडिकल कॉलेज से 13 और व्यक्तियों का नमूना कोरोना जांच के लिए भेजा गया है। मेडिकल कॉलेज के सीएमएस डॉ अरविंद सिंह ने बताया कि 11 मई तक गए सभी नमूनों की रिपोर्ट निगेटिव आई है। अब तक भर्ती किसी मरीज में कोरोना से संबंधित किसी प्रकार के लक्षण भी सामने नहीं आए हैं।
गोसाईगंज। प्रशासनिक तंत्र की लापरवाही से गोसाईगंज क्षेत्र और आसपास के कई लोगों पर कोरोना के संक्रमण का खतरा बढ़ गया है। जिसे घर परिवार के लोग हार्ट अटैक से मौत मानकर गफलत में थे, वह मौत वास्तव में कोरोना के संक्रमण के चलते हुई। मेडिकल कालेज से रिपोर्ट सार्वजनिक होने के बाद मृतक के घर-परिवार और नात रिश्तेदारों के साथ पुलिस प्रशासन में भी हड़कंप मचा हुआ है। देर रात ही पुलिस ने मुनादी करा दी है कि मौत हार्ट अटैक से नहीं, बल्कि कोरोना वायरस के संक्रमण से हुई थी। गांव को चारों तरव्फ से सील कर हॉटस्पॉट घोषित कर दिया गया है।
मृतक के घर परिवार को शहर मुख्यालय स्थित एक होटल और अंतिम संस्कार में शिरकत करने वाले 10 लोगों को दर्शन नगर मेडिकल कॉलेज में क्वारंटीन किया गया है। सभी की कोरोना वायरस जांच के लिए सैंपलिंग कराई जा रही है। थाना गोसाईगंज के माना पारा गांव का मजरा मैनपुर निवासी अधेड़ अपने पूरे परिवार के साथ मुंबई में रहता था। वह वहां इंडिया गेट के पास फोटोग्राफी कर जीवन यापन कर रहा था। उसके साथ अयोध्या जनपद के ही इसी थाना क्षेत्र के ईसापुर गांव निवासी उनके साले पूरन का बेटा विकास भी रहता था।
कोरोना महामारी के चलते मुंबई हॉटस्पॉट बना और आपदा व लॉक डाउन के चलते सभी काम धंधा बंद हो गये और सभी प्रवासी मजदूर माया नगरी मुम्बई को छोड़कर अपने अपने घर की तरफ भागने लगे। सरकार की ओर से गैर प्रांतों में फंसे प्रवासियों को उनके गृह जनपदों को पहुंचाने के लिए श्रमिक स्पेशल ट्रेनें चलाई गई। तो मायानगरी में फोटोग्राफी कर परिवार का भरण पोषण करने वाले अधेड़ ने भी घर वापसी के लिए परिवार व अपने साले के बेटे का पंजीकरण करा दिया।
सोमवार को उसे श्रमिक स्पेशल ट्रेन में सवार होकर बस्ती जिला मुख्यालय के लिए निकलना था। इसी कड़ी में सोमवार को अधेड़ अपने परिवार और साले के लड़के विकास को लेकर घर से निकले और बस पर बैठने वाली लाइन में लगे ही थे कि अचानक लाइन में लगे ईशापुर निवासी विकास पुत्र पूरन पांडे की मृत्यु हो गई। जबकि अधेड़ अपने गृह नगर अयोध्या आने के लिए अपने परिवार के साथ मुंबई बस्ती ट्रेन में सवार हो गए। साथ में बैठी पत्नी जयंती के अनुसार इटारसी से झांसी के बीच में उनके पति की मृत्यु हो गई।
इसे इत्तेफाक माना जाए या लापरवाही 54 यात्रियों के साथ कोरोना संक्रमित मृतक का शरीर 11 घंटे ट्रेन में यात्रा करता रहा और प्रशासन कव्े कानों तक खबर नहीं हुई। बुधवार को सुबह 3 बजे ट्रेन लखनऊ स्टेशन पहुंची तो चारबाग जीआरपी ने शव को कब्जे में लिया और लखनऊ सिविल अस्पताल के डॉक्टरों को बुलाकर किंग जॉर्ज मेडिकल कॉलेज के पोस्टमार्टम हाउस में मृत अधेड़ का पोस्टमार्टम कराया।
कोरोना संक्रमण की जांच के लिए गले और नाक का स्वैब का सैंपल लिए जाने के बाद आनन-फानन में शव को परिवार के हवाले कर दिया। परिवार के लोग एंबुलेंस की मदद से लखनऊ से शव लेकर गांव पहुंचे। पत्नी और बच्चों ने समझा कि शायद विकास की मौत के सदमे से ही इनकी मौत हो गई। यही बात घर परिवार और रिश्तेदारों को भी बताई गई। किसी अनहोनी और आशंका से परे नात रिश्तेदारों और घर परिवार के लोगों ने बिना कोई एहतियात बरतें मृतक का क्षेत्र के दिलासी घाट पर अंतिम संस्कार कर दिया।
शाम लगभग 9 बजे जब कोरोना की रिपोर्ट आई तो पूरा जिला हिल गया। आनन-फानन में तमाम पुलिस प्रशासन की गाड़ियों का जमावड़ा लग गया। उप जिलाधिकारी आयुष चौधरी, क्षेत्राधिकारी वीरेंद्र विक्रम सिंह, खंड विकास अधिकारी कृष्ण गोस्वामी, कोतवाली प्रभारी आशुतोष मिश्रा, सब इंस्पेक्टर रामप्रकाश सिंह, मौके पर पहुंचकर मैनपुर गांव को सील कर दिया और मुनादी करवा दी कि अधेड़ की मृत्यु हार्टअटैक से नहीं, बल्कि करोना संक्रमण से हुई है। इस घटना ने यूपी से लेार महाराष्ट्र प्रशास न पर कई प्रश्न चिन्ह लगा दिए हैं।
- जब बस की लाइन में साले के लड़के की मृत्यु हो गई, उसके पार्थिव शरीर की बिना जांच किए कोरना पॉजिटिव मिले मृतक अधेड़ और उसके परिवार को बस पर कैसे बैठाया।
- हर स्टेशन पर कामगारों को ट्रेन में बैठने से पूर्व जांच की जा रही है, फिर संक्रमित मरीज पूरे परिवार के साथ ट्रेन में कैसे बैठ गया।
- जब श्रमिक स्पेशल ट्रेन प्रशासन की निगरानी में चलाई जा रही है, तो कोरोना पॉजिटिव का मृत शरीर 11 घंटे तक 54 यात्रियों के बीच यात्रा कैसे करता रहा।
- सबसे बड़ी लापरवाही लखनऊ के केजीएमसी मेडिकल कॉलेज विभाग की है, जब करोना टेस्ट की रिपोर्ट नहीं आई थी तो मृत शरीर को परिजनों के हवाले कैसे कर दिया गया।
- इस लापरवाही का नतीजा है कि क्षेत्र के लोग आशंका के बीच जीने को विवश है। परिजनों के द्वारा संक्रमण फैलाने की आशंका है। अंत्येष्टि में आए लोगों को चिन्हित किया जा रहा है।
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