उसने रेलवे को निजीकरण की तरफ ले जाने से केंद्र को बाज आने को कहा। कर्मियों ने अपनी 36 मांगों को लेकर दोपहर एक बजे तक रेलवे स्टेशन अधीक्षक कार्यालय के सामने कमेटी के सुझावों के विरुद्ध नारेबाजी की।
यूनियन के मंडलीय अध्यक्ष आरजे कनौजिया, शाखा अध्यक्ष सुदर्शन सिंह, मंत्री हीरालाल ने कमेटी के सुझावों का जिक्र करते हुए अपना गुस्सा उतारा। बताया कि कमेटी ने आरपीएफ, जीआरपी, हॉस्पिटल और स्कूल को गैर जरूरी बताते हुए इसे समाप्त करने अथवा जरूरी होने पर ठेके पर करने का सुझाव दिया है।
कनौजिया ने कहा कि महंगाई भत्ता 50 फीसदी से ज्यादा हो गया है। इसे वेतन में मर्ज किया जाये। सातवें पे कमीशन की रिपोर्ट अगस्त 2015 तक पेश हो जाये। ऐसा न हो तो रिपोर्ट आने तक अंतरिम राहत दी जाये।
उन्होंने कहा कि रेल में एफडीआई सौ फीसदी की जा रही है। इसका विरोध करते हुए कहा कि गरीब-अमीर तबके के लोग रेल उपभोक्ता हैं। रेलवे की सेहत बरकरार रहे, इसके लिए एफडीआई लागू करने की कोई आवश्यकता नहीं है। कमेटी की संस्तुतियों के खिलाफ विरोध पखवारा 29 जून तक चलेगा।
30 जून को इसके खिलाफ सभी कर्मी काली पट्टी बांधकर कार्य करेंगे। बताया यूनियन की मांगें न मानने पर 23 नवंबर को देश व्यापी हड़ताल की जाएगी। धरने में एसएस जीपी सिंह, एसएसई एसआरआर रिजवी, एसपी सिंह, शीतला प्रसाद दुबे, आरपी सिंह, रमाकांत यादव आदि मौजूद रहे।