फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जिले में आर्थिक गणना पर भी सीएए व एनपीआर का साया

विज्ञापन
विज्ञापन
केस नंबर-एक
विज्ञापन

सोहावल के जगनपुर गांव में आर्थिक गणना करने पहुंची टीम को डाटा न देने से बात आगे बढ़ गई। यहां सीएए को हटाने के बाद डाटा देने की बात कही गई। इसकी खबर पर पुलिस को भी हस्तक्षेप करना पड़ा।
केस नंबर-दो
सोहावल के मंगलसी गांव में भी आर्थिक गणना के लिए लगभग दर्जन भर परिवार के लोगों ने डाटा नहीं दिया। इसके कारतण अब तक गांव का डाटा शामिल नहीं हो पाया।
अयोध्या। जिले में परिवारों की आर्थिक गणना पर सीएए व एनपीआर का साया पड़ने का अंदेशा है। कई गांव के लोग डाटा कलेक्शन नहीं करवा रहे हैं। आर्थिक गणना को सीएए और एनपीआर से जुड़े होने का भ्रम है।
विज्ञापन

इसको लेकर प्रशासन में हलचल है। भ्रम की स्थिति दूर करने के लिए अफसर मोर्चे पर आ गए हैं। लोगों से अपील की है कि आर्थिक गणना सीएए व एनपीआर से अलग है। भ्रम न पाले, गणना कर रहे लोगों का सहयोग करें।
जिले में रहने वाले परिवारों की आर्थिक स्थिति का आकलन करने के लिए आर्थिक गणना का काम शुरू है लेकिन इस पर नागरिकता संशोधन कानून और राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर का साया है। मुस्लिम बहुल गांव के लोग डाटा कलेक्शन न के बराबर करवा रहे हैं।
कई गांवों के लोगों ने अब तक डाटा कलेक्शन नहीं करवाया। इसके चलते काम प्रभावित होने की बात भी सामने आई है। सोहावल तहसील के जगनपुर में सीएए हटने के बाद डाटा कलेक्शन कराने की बात कही गई। मामला प्रशासन और पुलिस तक पहुंचा। संबंधित से पुलिस ने भी बुलाकर जानकारी ली।
कॉमन सर्विस सेंटर के डिस्ट्रिक्ट मैनेजर जाहिद उल्ला ने बताया कि तीन दिन पहले जगनपुर में आर्थिक गणना के लिए डाटा कलेक्शन के दौरान ऐसा हुआ। बताया कि मुस्लिम बहुल गांव में लोग आर्थिक गणना का डाटा कलेक्शन नहीं करवा रहे हैं। सोहावल के ही जगनपुर, चिर्रा आदि गांवों में अब तक डाटा कलेक्शन नहीं हो पा रहा है। मंगलसी में महज दस घरों का डाटा न मिलने कारण इसे पेश नहीं कर पा रहे हैं। लोगों में आर्थिक गणना को को लेकर भ्रम की स्थिति है। कहते हैं पहले सीएए हटवाओ। इसके बाद डाटा कलेक्शन कराएंगे।
आर्थिक गणना पर सीएए व एनपीआर का प्रभाव समाप्त करने के लिए अब अफसर मोर्चे पर आ रहे हैं। जिलाधिकारी की ओर सभी एसडीएम व बीडीओ को इस बावत पत्र लिखा जा रहा है। नोडल अफसर व जिला अर्थ एवं संख्याधिकारी धर्मेंद्र यादव ने बताया कि लोगों में आर्थिक गणना को लेकर सीएए व एनपीआर से जुड़े होने का भ्रम है। जिलाधिकारी की ओर से पत्र भेजा जा रहा है। उन्होंने लोगों से कहा है कि आर्थिक गणना का सीएए और एनपीआर से कोई संबंध नहीं है। भ्रम की स्थिति न पाले, आर्थिक गणना के डाटा कलेक्शन में सहयोग करें।
विज्ञापन

परिवार की आर्थिक स्थिति जानने को हो रही गणना
जिला अर्थ एवं संख्याधिकारी धर्मेंद्र यादव ने बताया कि कैंट क्षेत्र को छोडक़र शहर और देहात में रहने वाले परिवारों की आर्थिक स्थिति जानने के लिए आर्थिक गणना की जा रही है। इसकी जिम्मेदारी कॉमन सर्विस सेंटरों को सौंपी गई है। गणनाकर्मी घर-घर पहुंच मौके से ही मोबाइल के जरिए परिवार का डाटा ऑनलाइन करेंगे। इसके लिए केंद्रों को सॉफ्टवेयर उपलब्ध कराया गया है। बताया गया है कि गरीबों के लिए भविष्य में बनने वाली योजनाओं के मकसद से गणना कराई जा रही है। इसके लिए परिवार की आर्थिक स्थिति जानना जरूरी होता है। इसका सीएए व एनपीआर से कोई लेना-देना नहीं है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें