ऐसे विद्यालयों में उधार के अध्यापकों से काम चलवाया जा रहा है। जिससे शिक्षा विभाग के अधिकारियों की लापरवाही सामने आ रही है।
क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय कोदैला में 153 बच्चों पर मात्र एक अध्यापक की तैनाती है। शिक्षक को पढ़ाने के अलावा दोपहर का भोजन, विभागीय मीटिंग सहित अन्य कार्य को करना होता है।
यहां तैनात कंचन पांडेय ने बताया कि 153 बच्चों को कंट्रोल कर शिक्षा दे पाना आसान नहीं है। इमरजेंसी काम के लिए बीईओ से संपर्क करना पड़ता है।
इसी तरह महांवा के प्राथमिक स्कूल में एक भी शिक्षक नही है। यहां की प्रधानाध्यापिका कमलावती पांडेय जून में सेवानिवृत्त हो चुकी है। यहां पर दूसरे विद्यालय के अध्यापक को अटैच किया गया है।
यही नहीं यहां प्रसाधन निर्माण के लिए नंदरौली के अध्यापक राम अचल को लगाया गया है। बता दें कि इसी विद्यालय में दो साल पूर्व दो बच्चे तालाब में डूब कर मर चुके हैं।
प्राथमिक विद्यालय पूरे नंदन का पुरवा पर तैनात अध्यापक का प्रमोशन होने के बाद यहां भी किसी अध्यापक की तैनाती नही है। एक अन्य विद्यालय की अध्यापिका को यहां भी अटैच किया गया है।
इसी तरह पूर्व माध्यमिक विद्यालय पकड़ी दुर्गादासपुर, वासुदेवपुर में एकल अध्यापक के सहारे विद्यालय संचालित किया जा रहा है। इस मामले पर खंड शिक्षा अधिकारी कमला प्रसाद प्रजापति ने बताया कि कोदैला सहित सभी विद्यालयों में जहां अध्यापक कम है वहां तैनाती का प्रयास किया जा रहा है।