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मेडिकल कॉलेज में बनेगा ब्लड बैंक

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अयोध्या। यदि सब कुछ आशानुरूप रहा तो शीघ्र ही जिले की स्वास्थ्य सेवाओं में एक और इजाफा होगा। राजर्षि दशरथ मेडिकल कॉलेज दर्शननगर में एक हजार यूनिट क्षमता का ब्लड बैंक स्थापित किया जाएगा। मौजूदा समय में उपकरणों की खरीददारी का अंतिम रूप दिया जा रहा है। लाइसेंस की अनुमति देने व सर्वे के लिए केंद्रीय व राज्य की स्वास्थ्य टीमों को आमंत्रण पत्र भेजा गया है। यह सुविधा मिलने से रक्त के अभाव में मरीजों की जान बचाने में सहूलियत होगी।
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जिले की करीब 29 लाख आबादी के इलाज के लिए सिर्फ जिला अस्पताल में एकमात्र ब्लड बैंक स्थापित है। यूं तो इसकी क्षमता 600 यूनिट है। लेकिन, अधिक खपत का नतीजा है कि यहां आधा भी भंडारण नहीं हो पाता है। यहीं से जिले के सभी निजी व सरकारी अस्पतालों में मरीजों को ब्लड आपूर्ति किया जाता है। सरकारी अस्पतालों में सिर्फ डोनर लाने पर ब्लड मिल जाता है। लेकिन, निजी अस्पतालों में भर्ती मरीज को 1050 रुपये शुल्क व एक डोनर लाना होता है।
यहां सबसे ज्यादा खपत बी पॉजिटिव ब्लड ग्रुप की है। सबसे बड़ी दिक्कत निगेटिव ब्लड ग्रुप के मरीजों को होती है। हर समय ए, बी, ओ, एबी आदि निगेटिव ब्लड ग्रुपों की कमी रहती है। इमरजेंसी में आवश्यकता होने पर वेबसाइट पर दर्शाए गए रक्तदाताओं का सहारा लिया जाता है। उनसे संपर्क करने पर किसी तरह व्यवस्था होती है। कभी-कभी इस भागदौड़ के चक्कर में मरीजों को जान तक गंवानी पड़ती है।
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वहीं, दर्शननगर स्थित राजर्षि दशरथ मेडिकल कॉलेज के अस्पताल में इन दिनों स्वास्थ्य सेवाओं में इजाफा किया जा रहा है। शासन की शीर्ष प्राथमिकता में शामिल इस परिसर को तमाम उच्चीकृत सुविधाओं से लैस करने की तैयारी है। मौजूदा सत्र में एमबीबीएस की कक्षाएं संचालित होने के बाद यहां चिकित्सकों की आमद शुरू हुई तो ओपीडी में भी इजाफा हुआ।
तीन सौ शैय्या के इस अस्पताल में करीब दो सौ से अधिक मरीज प्राय: भर्ती रहते हैं। यहां छोटे-बड़े कई प्रकार के आपरेशन भी शुरू हो गए हैं, लेकिन इमरजेंसी में रक्त की आवश्यकता पडने पर तीमारदारों को लंबी भागदौड़ करना पड़ता है। इन्हीं समस्याओं से निजात के लिए अब इस अस्पताल में भी ब्लड बैंक की स्थापना किया जाना है। मौजूदा समय में करीब छह सौ यूनिट क्षमता के हिसाब से उपकरणों की खरीद भी शुरू हो गई है।
ब्लड बैंक प्रभारी डॉ रणविजय सिंह ने बताया कि रक्त के अवयव प्लेटलेट, आरबीसी, प्लाज्मा आदि को अलग-अलग करने के लिए करीब सवा करोड़ के 22 सामानों की खरीददारी हो चुकी है। जिसे अस्पताल में शिफ्ट किया जा रहा है। अभी एक हजार यूनिट क्षमता के हिसाब से सामानों की खरीददारी हो रही है। अब तक प्राप्त हुए सामानों को मानक के अनुरूप शिफ्ट किया जा रहा है। लाइसेंस के लिए स्टेट ड्रग कंटोलर आफिसर कार्यालय में आवेदन किया जा चुका है। शीघ्र ही टीम निरीक्षण के लिए आएगी और कमियों को चिह्नित करके दूर किया जाएगा। लाइसेंस जारी होते ही ब्लड बैंक संचालित हो जाएगा और जनपदवासियों की स्वास्थ्य सेवाओं में और इजाफा होगा।
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