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भैया दूज मनाई

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अयोध्या। दीपावली तीसरे दिन बाद पड़ने वाले पर्व भैया दूज पूर्व पर भाई-बहन के प्रेम की डोर मजबूत होती दिखी। सुबह स्नान के बाद बहनों ने भाइयों को तिलक लगाया और मुंह मीठा किया। भाई से वचन लिया कि इस दिन वह कहीं भी रहे, उनके पास जरूर पहुंचेंगे। उधर यम द्वितीया पर लोगों ने जमथरा पहुंच कर यम से मुक्ति के लिए स्नान और पूजन-अर्चन किया। इस दौरान जमथरा के अलावा कई स्थानों पर मेले भी लगे।
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भाई-बहन के प्रेम और रक्षा का पर्व रक्षाबंधन के बाद स्नेह का दूसरा पर्व भैया दूज है। भैया दूज में बहनें भाई की लंबी आयु की प्रार्थना करती हैं। भाई दूज का त्योहार कार्तिक मास की द्वितीया को नगर से गांव तक मनाया गया। आचार्य देवनाथ कहते हैं, पर्व का प्रमुख मकसद भाई-बहन के पावन संबंध व प्रेमभाव को और मजबूत करना है। बहनें भाइयों के स्वस्थ तथा दीर्घायु की मंगल कामना कर तिलक लगाती हैं।
भाइयों को तेल मलकर नदी में स्नान भी कराती हैं। नदी न होने की दशा में भाई को घर पर नहाना होता है। उन्होंने कहा कि यदि बहन अपने हाथ से भाई को भोजन कराये तो भाई की उम्र बढ़ती है और जीवन के कष्ट दूर होते हैं। बहनें भाइयों को चावल खिलाती हैं। बहन शादीशुदा हो तो उसके घर भोजन करने का विशेष महत्व है। बहन सगी, चचेरी अथवा ममेरी कोई हो सकती है। बहन न हो तो गाय, नदी आदि का ध्यान करके या उसके पास बैठकर भोजन करना भी शुभ माना जाता है।
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उधर यम द्वितीया पर लोगों ने जमथरा पहुंच कर यम से मुक्ति के लिए स्नान और पूजन-अर्चन किया। इस दौरान सरयू तट पर बने यमराज के मंदिर में लोगों ने विशेष पूजा कर परिवार की सुख समृद्धि के लिए आशीर्वाद मांगा। मंदिर के महंत अवध किशोर शरण ने बताया कि यम द्वितीया के अवसर पर हर वर्ष यहां मेला लगता है, लोग यमराज का पूजन अर्चन करते है।
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