गुमनामी बाबा के सामान संरक्षित व प्रदर्शित करने के लिए बुधवार को प्रदेश सरकार की सात सदस्यीय टीम यहां पहुंची। टीम ने बाबा के सामान के चयन की कार्रवाई शुरू कर दी है। पहले दिन कुल 122 सामान का चयन हुआ। इनको अयोध्या के अंतर्राष्ट्रीय रामकथा संग्रहालय ले जाया जाएगा। हाईकोर्ट के आदेश पर गुमनामी बाबा/भगवनजी के सामानों को संरक्षित और प्रदर्शित किया जाना है।
इसके लिए गठित की गई सात सदस्यीय तकनीकी टीम बुधवार को यहां पहुंची। टीम के सदस्यों में राष्ट्रीय संरक्षण प्रयोगशाला, अभिलेखागार, निदेशालय संग्रहालय, मध्यकालीन इतिहास विभाग के प्रोफेसर, रामकथा संग्रहालय के प्रभारी उप निदेशक सहित तकनीकी विशेषज्ञों के साथ ही नेताजी सुभाषचंद्र बोस विचार मंच के संयोजक शामिल हैं।
टीम ने कोषागार में पहुंचकर मुख्य कोषाधिकारी राजेश पांडेय के साथ सामानों के बाबत बैठक कर बातचीत की। इसके बाद कोषागार के डबल लॉक में रखे बक्सों को खोलकर सामानों की पड़ताल के साथ चयन का काम शुरू किया गया। प्रभारी उप निदेशक रामकथा संग्रहालय योगेश कुमार के मुताबिक बुधवार को नौ बक्सों से 122 सामान का चयन संग्रहालय में रखे जाने के लिए किया गया है।
इसके पूर्व जिला प्रशासन से गठित की गई प्रशासनिक समिति ने कोषागार में रखे बाबा के सामान की सूची के साथ ही राज्य स्तरीय समिति को सौंप दिया था। उस दौरान तकनीकी टीम ने फोटोग्राफी व वीडियोग्राफी भी कराई थी। अब इन सामानों को संग्रहालय में संरक्षित और प्रदर्शित करने की कार्रवाई तकनीकी टीम ने शुरू की है।
नेताजी सुभाषचंद्र बोस विचार मंच के संयोजक शक्ति सिंह के मुताबिक, चयनित सामानों में बाबा की घड़ी, चश्मा, दूरबीन, सिगार पाइप सहित अन्य सामान हैं। बताया कि टीम के सदस्य सात अप्रैल को भी सामान निकालने के लिए कोषागार आएंगे। बाबा के सामानों को संरक्षित और प्रदर्शित किए जाने के लिए 31 मार्च तक की तिथि बताई गई थी लेकिन यह तिथि बीत गई।
सामान प्रदर्शित नहीं हो पाए। चर्चा है कि इस पर प्रदेश शासन की सीधी नजर है। शायद यही कारण है कि जिला प्रशासन से अयोध्या के रामनवमी मेले के बाद तकनीकी टीम आने संबंधी पत्र के बावजूद टीम यहां पहुंच गई और सामान के चयन की कार्रवाई शुरू कर दी गई है।