जिला महिला अस्पताल में प्रसव के दौरान बच्चा और कुछ घंटे बाद जच्चा (मां) की मौत पर बुधवार सुबह जमकर हंगामा हुआ। दो घंटे तक अफरातफरी मची रही। मौत पर पहुंची पड़ोसियों की भीड़ और पति ने अस्पताल स्टाफ पर दो हजार रुपये मांगने और न मिलने पर इलाज में लापरवाही का आरोप लगाया।
इस दौरान से स्टाफ से बदसलूकी भी हुई। जिसे लेकर ड्यूटी पर तैनात नर्सों और स्टाफ ने भी प्रदर्शन शुरू कर दिया। सीएमएस को बदसलूकी व अभद्रता की लिखित शिकायत देकर काम रोक दिया। मौके पर मची अफरातफरी की सूचना पर पहुंचे प्रशासन व पुलिस के अधिकारियों ने स्थिति संभाली।
हालांकि बाद में सीएमएस कक्ष में बनी सहमति के बाद परिवारीजन पोस्टमार्टम और किसी के खिलाफ तहरीर दिये बिना शव लेकर चले गये। कैंट थाना क्षेत्र के शिवनगर कॉलोनी, सआदतगंज निवासी अमरनाथ अपनी पत्नी कुसुम (35) को प्रसव के लिए बाइक से मंगलवार की सुबह 9:30 बजे जिला महिला अस्पताल पहुंचा था।
कुसुम को 11 बजे अस्पताल में भर्ती किया गया। वह पड़ोसी व सपा के एक वरिष्ठ नेता के घर काम करती थी। तीमारदारी के लिए एक पड़ोसन सरोज भी साथ में थी। अमरनाथ व सरोज ने आरोप लगाया कि कुसुम को बेड नहीं मिला। लेबर पेन बढ़ाने के लिए सिस्टर ने कुसुम को टहलते रहने की सलाह दी थी।
रात नौ बजे के करीब तेज बुखार हुआ तो उसे दवा दी गयी। रात दो बजे के करीब तेज दर्द पर कुसुम को लेबर रूम ले जाया गया। साढ़े तीन बजे के करीब नॉर्मल प्रसव कराया गया, लेकिन बच्चा मरा था। इनका कहना था कि सुबह छह बजे खून लाने को कहा गया। अमरनाथ खून का प्रबंध करने चला गया।
साढ़े सात बजे के करीब बातचीत करती कुसुम की तबीयत अचानक खराब हुई और मौत हो गयी। निधन की सूचना पर सपा नेता की पत्नी व पास-पड़ोस के तमाम लोग अस्पताल पहुंच गये और हंगामा शुरू हो गया। भीड़ का आरोप था कि दो हजार रुपये न मिलने से इलाज में लापरवाही हुई और जच्चा-बच्चा की जान चली गई।
ड्यूटी पर तैनात नर्सें उर्मिला विश्वकर्मा, गीता पांडेय, रामा, किरन पांडेय, रूपा का कहना था कि भीड़ ने उर्मिला को मारापीटा, अभद्रता व बदसलूकी की। फाइलें फेंक दी गयीं। इसके बाद पूरे स्टाफ ने काम ठप कर प्रदर्शन शुरू कर दिया। सीएमएस डा. नीरजा माला से लिखित शिकायत की गयी है।
करीब दो घंटे के हंगामे के दौरान एसडीएम दीपा अग्रवाल, सीओ जवाहरलाल, कोतवाल जितेंद्र सिंह पुलिस फोर्स लेकर अस्पताल पहुंचे और दोनों पक्षों को काबू में किया। प्रशासन की मौजूदगी में दोनों पक्षों में सहमति बन गयी। किसी पक्ष ने पुलिस को कोई तहरीर नहीं दी है। कोतवाल जितेंद्र ने बताया कि परिवारीजनों ने शव का पोस्टमार्टम कराने से मना कर दिया और पंचनामे के बाद शव लेकर चले गये।