सांस फूली, गले में दिक्कत हुई और पति-पत्नी की एक साथ मौत हो गई। जिसने भी सुना, वही दंग रह गया। कुछ घंटे पहले तक सबकुछ ठीकठाक था और अचानक ऐसा क्या हुआ कि सबकुछ खत्म। बच्चों के सिर से एक साथ मां-बाप का साया उठ गया। बेटी के हाथ पीले करने का दंपती का सपना भी अधूरा रह गया।
घटना उत्तर प्रदेश के अयोध्या जिले में हैरिंग्टनगंज बाजार के रहने वाले लल्लन तिवारी (48) और उनकी पत्नी सरस्वती तिवारी (45) के साथ हुई। मृत दंपती के पुत्र शैलेंद्र तिवारी के मुताबिक, रात में सभी ने एक साथ भोजन किया। उसने दूध रोटी खाई तो मम्मी-पापा और बहन ने रोटी और तरोई की सब्जी खाई। भोर 4:30 बजे मम्मी, पापा को सांस लेने में दिक्कत हुई और गले में दर्द होना शुरू हुआ। पापा ने कार निकाली और बाजार के एक निजी चिकित्सक से सलाह लेने पहुंचे, तभी उनकी तबीयत और बिगड़ने लगी। डाॅक्टर ने दोनों को सीएचसी ले जाने की सलाह दी। पापा ने फोन करके अपने रिश्तेदार प्रमोद मिश्र को बुलाया और सीएचसी हैरिंग्टनगंज गए। यहां चिकित्सक ने देखने के बाद जिला मुख्यालय ले जाने की सलाह दी। इसके बाद दोनों को शहर के जनौरा स्थित एक प्राइवेट हॉस्पिटल ले जाया गया लेकिन तब तक पति-पत्नी दोनों की स्थिति काफी गंभीर हो चुकी थी। डाॅक्टर ने दोनों को ट्रॉमा सेंटर दर्शननगर रेफर कर दिया। दर्शननगर ट्रॉमा सेंटर में दोनों की मौत हो गई। दंपती की इस तरह से हुई मौत से गांव में सभी अचंभित हैं और तरह-तरह की चर्चाएं भी होती रहीं।
तीन बच्चों के सिर से उठा मां-बाप का साया
मृतक लल्लन तिवारी के तीन बेटियां और एक बेटा है। वह साधारण किसान थे। पत्नी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता थीं। बेटा शैलेंद्र तिवारी (19) बीए द्वितीय वर्ष का छात्र है। शैलेंद्र तीनों बहनों से छोटा है। बड़ी बहन ज्योति की शादी हो चुकी है और वह अपने पति के साथ दिल्ली में रहती है। दूसरी बहन स्वाति तिवारी बीएड करके प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रही है। तीसरी बहन सपना तिवारी बीएड करके कानपुर में तैयारी कर रही है।
जिसने सुना वही रह गया अवाक
पलिया चौराहे पर पान की दुकान चलाने वाले सुखदेव चौरसिया कहते हैं कि रात आठ बजे तक लल्लन तिवारी यहीं चौराहे पर थे। सबसे बातचीत कर रहे थे। सुनकर अचरज हो रहा है। शिक्षक वीरेंद्र दुबे बताते हैं कि अभी शाम को तो मिले थे, दुआ-सलाम हुई, कौन जानता था कि उनके साथ अचानक ऐसा हो जाएगा। ट्राॅमा सेंटर में शव के साथ रहकर लिखा-पढ़ी करा रहे बसवार कलां के प्रधान अशोक तिवारी कहते हैं कि आखिर ऐसा क्या हो गया कि कुछ ही देर में सबकुछ खत्म हो गया। लल्लन तिवारी बहुत ही मिलनसार और सामाजिक व्यक्ति थे।