अयोध्या। रामनगरी में रामविवाह महोत्सव को लेकर तैयारियां तेज हो गयी हैं। रामनगरी के मंदिरों में रामविवाह उत्सव की छटा सोमवार से बिखरने लगेगी, धार्मिक अनुष्ठानों का सिलसिला शुरू हो जाएगा। जिसके लिए मंदिरों को रंग-बिरंगी लाइटों एवं फूल मालाओं से भव्यता प्रदान किया जा रहा है। 19 दिसंबर को मंदिरों से भव्य रामबारात पूरे राजसी भव्यता के साथ निकाली जाएगी। इस बार राममंदिर निर्माण शुरू होने के चलते रामविवाहोत्सव का उल्लास दोगुना है, इसकी खुशी उत्सव में स्पष्ट झलकेगी।
भगवान श्रीराम के विवाह उत्सव की तैयारी में रामनगरी लीन है। सोमवार को धार्मिक उत्सव व अनुष्ठानों का सिलसिला भी प्रारंभ हो जाएगा। हालांकि इस वर्ष कोरोना प्रोटोकाल के चलते विवाह उत्सव में सीमित लोगों को शामिल होने की अनुमति होगी बावजूद इसको महोत्सव की तैयारी पूरे भव्यता के साथ की जा रही है। श्री राम विवाह महोत्सव का आयोजन 14 दिसंबर से ही प्रारंभ हो जाएगा।
मंदिरों में रामकथा, रामलीला के साथ-साथ विभिन्न प्रकार के आयोजन किए जाएंगे वहीं 17 व 18 दिसंबर को हिंदू रीति रिवाज से होने वाले विवाह में हल्दी रस्म, मेहंदी रस्म, तेल पूजा का भी आयोजन किया जाएगा। 19 दिसंबर को भगवान श्री राम की भव्य बारात अयोध्या के मठ मंदिरों से निकाली जाएगी। वहीं 19 दिसंबर की ही रात्रि भगवान श्रीराम व माता जानकी का प्रतीकात्मक विवाह आयोजन होगा। इसके अगले दिन कलेवा महोत्सव भी श्रद्घा का केंद्र होगा। इसको लेकर मठ-मंदिरों को विविध तरीकों से भव्यतम रूप दिया जा रहा है।
राजसी वैभव के साथ मनाएंगें विवाहोत्सव: देवेंद्रप्रसादाचार्य
दशरथमहल में रामविवाहोत्सव का आगाज सोमवार से रामकथा के साथ हो जाएगा। महंत बिंदुगाद्याचार्य स्वामी देवेंद्रप्रसादाचार्य ने बताया कि सोमवार से प्रतिदिन सांयकाल तीन से छह बजे तक रामकथा सहित अन्य धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन होगा। कहा कि चूंकि रामलला का भव्य मंदिर बन रहा है इसलिए रामविवाहोत्सव का उल्लास दो गुना हो गया है।
पूरे राजसी वैभव के साथ उत्सव मनाने की तैयारी है। कहा कि भगवान राम चेतना के प्रतीक हैं और माता सीता प्रकृति शक्ति की, अत: चेतना और प्रकृति का मिलन ही सीताराम विवाहोत्सव है। बताया कि 19 दिसंबर को मंदिर से भव्य रामबारात पूरे शानो शौकत के साथ निकाली जाएगी।
प्रभु के समीप ले जाती है विवाह की उपासना: मिथिलेश नंदनी
महंत मिथिलेश नंदनी शरण रामविवाह की महिमा बताते हुए कहते हैं कि सीताराम विवाह का उत्सव प्रभु के समीप जाने का सशक्त माध्यम है। रस रूपी परमात्मा से जुड़ने के लिए जीवात्मा अनेक पद्घतियां अपनाता है। उपासना पद्घति में सख्य भाव, दास्य भाव है तो मधुरोपासना की भी परंपरा है। इस उपासना में भक्त परमात्मा के माधुर्य की उपासना करते हैं।
उनके समीप जाने का सबसे सरल माध्यम मधुरोपासना ही है। माधुर्य की उपासना या यूं कहें कि प्रभु के विवाह की उपासना उनके करीब ले जाती है। विवाहोपासना वह पद्घति है जिसके जरिए परमात्मा रस से बंधकर जीवात्मा सिद्घियों के साथ तादात्मय स्थापित कर प्रभु का सामीप्य प्राप्त कर सकता है।