अयोध्या। अखिल भारत वर्षीय गोंड महासभा ने गोंड वीरांगना महारानी दुर्गावती जयंती पर उनके चित्र पर माल्यार्पण किया और उन्हें याद किया। बाद में वक्ताओं ने कार्यकर्ताओं से वीरांगना महारानी दुर्गावती के आदर्शों का अनुसरण कर उनके बताए रास्ते पर चलें।
गोंड मंदिर अयोध्या में आयोजित कार्यक्रम में गोंड महासभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं प्रदेश बाबूराम गोंड ने कहा कि गोंड समाज की महारानी दुर्गावती के दिखाए हुए रास्ते को गोंड समाज को अनुसरण करना चाहिए और उनके कुशल शासक संगठित करने की सीख लेनी चाहिए।
गोंड ने विस्तार से महारानी दुर्गावती के जीवनी पर प्रकाश डालते हुए कहा रानी दुर्गावती का जन्म राजा चंदेल साल बानो के यहां 5 अक्टूबर 1524 नवरात्र सप्तमी के दिन जन्म हुआ था। नवरात्र में जन्म होने के कारण उनका नाम दुर्गावती रखा गया। उनकी माता का नाम महोबा था। रानी दुर्गावती बचपन से ही तलवार चलाना सभी शस्त्र चलाने की जानकारी प्राप्त कर ली थी।
रानी दुर्गावती जी का सन् 1542 में उनकी शादी राजा संग्राम सिंह शाह के पुत्र दलपतशाह से हुई। शादी के पांच वर्ष बाद दलपत शाह का निधन हो गया। दोनों ने 4 साल के पुत्र वीर नारायण को गद्दी पर बैठाकर कुशल शासक के रूप में 15 वर्षों तक चलाया।
इसी दौरान मुगल शासक अकबर को तीन बार उनकी सेना को हराकर भगाया। फिर धोखे से चारों तरफ से मुगल सेना ने रानी दुर्गावती के सेनापति को मिलाकर हमला बोल दिया और उसी लड़ाई में 24 जून 1564 को वीरगति प्राप्त हुई। कार्यक्रम की अध्यक्षता विनोद गौंड ने किया। कार्यक्रम को संतराम गौंड, केशवराम गुप्ता, दलसिंगार, शकुंतला देवी, रामा देवी, जवाहिर धुरिया आदि संबोधित किया। संचालन अम्ब्रीश गोंड ने किया।