अयोध्या। सरकार सभी पर्यटकोें को कम से कम एक दिन अयोध्या में रोकने के लिए सांस्कृतिक व हेरिटेज यात्रा कराने की योजना बना रही है। इसके जरिए जहां युवाओं को रोजगार मिलेगा, वहीं आर्थिक परिदृश्य बदल जाएगा।
संस्कृति मंत्रालय दो शिफ्ट में सुबह 6.30 व दोपहर 12.30 बजे से रोजाना रामनगरी से भरत की तपस्थली व मखौड़ा तक छह-छह घंटे की सांस्कृतिक यात्रा कराएगा। सुबह 6 बजे से 8 बजे तक सरयू के सुरम्य वातावरण में राम की पैड़ी तक हेरिटेज वॉक होगी। यात्रा में आने वाले स्थानों के धार्मिक महत्व को समझाने वाले युवा गाइड तैयार होंगे, साथ ही पुस्तक व ऑनलाइन सामग्री भी छपेगी।
राममंदिर निर्माण के साथ धीरे-धीरे अयोध्या में श्रद्घालुओं एवं पर्यटकों की संख्या बढ़ रही है। जैसे ही कोरोना काल समाप्त होगा अयोध्या में करोड़ों की संख्या में श्रद्घालु एवं पर्यटक पहुंचेंगे। पर्यटन विभाग ने 2031 तक 6.8 करोड़ देशी-विदेशी पर्यटकों के आने का अनुमान लगाया है। ऐसे में अयोध्या को राममंदिर के ही समानांतर समन्वित पर्यटन विकास को लेकर केंद्र व राज्य सरकार के तमाम विभाग सक्रिय हैं।
सांस्कृतिक भ्रमण व हेरिटेज वॉक के जरिए अयोध्या आने वाले पर्यटकों को रामनगरी की धार्मिक महत्ता, पौराणिक स्थलों व उनसे जुड़ी मान्यताओं व महत्व से परिचित कराया जाएगा। इसके लिए संस्कृति विभाग ने तीन शिफ्टों की समय सारणी भी तय कर ली है। हेरिटेज वॉक के लिए सुबह का समय व सांस्कृतिक भ्रमण के लिए सुबह से दोपहर व दोपहर से शाम का समय निर्धारित है।
पर्यटक सुबह 6.30 से शाम 6.30 तक कल्चरल व हेरिटेज वॉक कर सकेंगे। पर्यटक अब रामनगरी में प्रात: 6 बजे से 8 बजे तक हेरिटेज वॉक कर सकेंगे। हेरिटेज वॉक ऋणमोचन चौराह से शुरू होकर झनुकीघाट, गोलाघाट, सहस्रधारा घाट, शेषावतार, मुक्तिगली से होते हुए मखौड़ा तीर्थस्थल पर समाप्त होगी, कुल 16 किमी. का वॉक कराया जाएगा। वहीं सांस्कृतिक भ्रमण सुबह 6.30 से दोपहर 1.30 बजे तक होगा।
भ्रमण रूट लक्ष्मण मदिर सहस्रधारा घाट, चंद्रहरि महादेव, नागेश्वरनाथ मंदिर, राम की पैड़ी, कोरिया पार्क, अंतरराष्ट्रीय रामकथा संग्रहालय, बिल्वहरि मंदिर, दशरथ समाधि स्थल, शीतला देवी बड़ी देवकाली मंदिर, हनुमानगढ़ी, कनकभवन होते हुए श्रीराम जन्मभूमि पर आकर समाप्त होगा। वहीं दूसरे शिफ्ट में दोपहर 12.30 बजे से शाम 6.30 बजे तक हनुमानगढ़ी, कनभवन, श्रीराम जन्मभूमि ब्रह्मकुंड, चक्रतीर्थ, दुग्धेश्वर नाथ, गुप्तारघाट, गुप्तहरि मदिर, गिरिजा कुंड, भरत कुंड, नंदीग्राम, गया कुंड, पिचास मोचन के बाद राम की पैड़ी सरयू आरती घाट पर यह भ्रमण समाप्त होगा।
सांस्कृतिक व हेरिटेज यात्रा तात्कालिक तौर पर कम से कम एक दिन पर्यटक को रोकने में कामयाब होगी। अभी तक लोग दो घंटे में घूमकर लखनऊ, गोरखपुर, कौशांबी या वाराणसी चले जाते हैं। न कभी टूरिस्ट प्लान बना न गाइडबुक है न गाइड। अब अयोध्या को उसके धार्मिक आभा के अनुरूप तैयार करने की तैयारी हो रही है, लेकिन इसमें वक्त लगेगा।
प्रो. विनोद श्रीवास्तव, अर्थशास्त्री अवध विश्वविद्यालय, अयोध्या
हेरिटेज व कल्चरल वॉक में स्वर्गद्वार व रामकोट के पौराणिक स्थल मुख्य केंद्र होंगे। रामकोट में ही श्रीरामजन्मभूमि, सिद्घपीठ हनुमानगढ़ी सहित महाराज दशरथ का महल व कनकभवन स्थित है। इसके अतिरिक्त अन्य कई मंदिर हैं जो रामनगरी की प्राचीनता के गवाह हैं। जबकि स्वर्गद्वार में नागेश्वरनाथ, कालेराम मंदिर, शेषावतार मंदिर, चंद्रहरि महादेव मंदिर सहित अन्य कई पौराणिक स्थल भी हैं।
गोरखपुर विवि के भूगोल विभाग के असिस्टेंट प्रो.सर्वेश कुमार ने बीएचयू के भूवैज्ञानिक प्रो.राना पीबी सिंह के निर्देशन मे शोध करते हुए पाया है कि अयोध्या शहर का भौगोलिक केंद्र यानि की नाभि नागेश्वरनाथ मंदिर के ही निकट है।
हेरिटेज वॉक में शामिल मखौड़ा धाम व भरत तपस्थली भी सिद्घपीठों में शुमार हैं। मखौड़ा धाम में ही महाराजा दशरथ ने पुत्रेष्टि यज्ञ किया गया था। जिसके बाद राम सहित चारों भाईयों की उन्हें प्राप्ति हुई थी। मखौड़ा धाम में आज भी पुत्रेष्टि यज्ञ का महत्व है।
अयोध्या से करीब 16 किमी. दूर भरत की तपोभूमि भरतकुंड है। मान्यता है कि भगवान राम के बनवास के दौरान भरतजी ने उनकी खड़ाऊं रखकर यहीं 14 वर्ष तक तप किया था। यही वह स्थान है जो बनवास से लौटे राम और भरत के मिलन का साक्षी रहा है। यहीं प्रभु श्रीराम ने अपने पिता का श्राद्घ भी किया था।
पर्यटन विभाग रामायण सर्किट के तहत 200 करोड़ का जल्द ही प्रस्ताव भेजेगा। इसके जरिए अयोध्या के सभी प्रवेश मार्गों पर भव्य तोरण द्वार, परिक्रमा पथों का विकास, टूरिस्ट फैसलिटेशन सेंटर आदि विकसित किए जाएंगे। अयोध्या में प्रस्तावित वैदिक सिटी व नव्य अयोध्या को लेकर भी अब काम तेज होने जा रहा है।
वैदिक नगरों की तरह इसका ले आउट धनुषाकार होगा। इसे भगवान राम की प्रतिमा के पास से योजना के दूसरे हिस्से और सड़कों को ऐसे जोड़ा जाएगा, जैसे सूर्य की किरणें निकल रही हैं। दक्षिण कोरिया सहित पांच देशों के लिए भी जगह आरक्षित की जाएगी। 50 से अधिक भूखंड धार्मिक संप्रदायों, मठों, आश्रमों व धर्मशालाओं के लिए भी आवंटित किए जाएंगे।
सरयू किनारे माझा बरेहटा में 251 मीटर ऊंची प्रभु राम की मूर्ति के जरिए विश्व रिकॉर्ड अयोध्या में होगा। सरकार की योजना है कि अयोध्या में प्राकृतिक सौंदर्य और सहजता बनाए रखने के लिए सोलर सिटी के साथ इको व ग्रीन सिटी के रूप में विकसित हो। मूर्ति के पैडस्टल में एक्टिविटी सेंटर व पर्यटक सुविधाएं, भगवान श्रीराम पर आधारित डिजिटल म्यूजियम, इंटरप्रेटेशन सेंटर, लाइब्रेरी, पार्किंग, फूड प्लाजा, लैंड स्केपिंग व अन्य पर्यटक सुविधाओं का भव्य नजारा दिखेगा।
नई अयोध्या में वैदिक काल से लेकर महाकाव्य काल तक के चित्रण और उसकी भावभूमि से दर्शकों को परिचित करवाने की तैयारी है। इसके लिए ऑडियो-विजुअल माध्यम का भी इस्तेमाल होगा।
प्रवेश करते ही वैदिक सेक्टर होगा, जिसमें चारों वेदों के कालक्रम के अनुसार सेक्टर बनाए जाएंगे। इसके बाद 10 प्रमुख उपनिषदों, प्रमुख पुराणों का उनके कालक्रम के अनुसार सेक्टर होगा। रामायण व महाभारत दोनों ही महाकाव्यों की अहम घटनाओं और पक्षों को दर्शाती गैलरियां होंगी। बिल्डअप स्पेस 5 प्रतिशत करने की तैयारी है।