अयोध्या। वैसे तो महंगाई अपने चरम पर है लेकिन, इसका असर चौक की श्रीरामजानकी रामलीला समिति पर नहीं दिखेगा। यहां का रावण सभी रामलीला समितियों से बड़ा होने के साथ सबसे मंहगा भी होगा। श्रीराम जानकी रामलीला समिति के अध्यक्ष विष्णु कुमार बताते हैं कि इस बार रावण का पुतला 40 फिट का होगा। इस पर लगभग 40 हजार से अधिक की धनराशि खर्च हो रही है। वह बताते हैं कि मंगलवार की सांय को रामलीला ग्राउंड पर रावण के पुतले का दहन किया जाएगा। इसके बाद राम बारात व राज्याभिषेक का कार्यक्रम संपन्न होगा।
भगवान श्रीराम की नगरी अयोध्या में 200 स्थानों पर विजयदशमी यानी दशहरे का त्योहार धूमधाम से मनाया जाता है। हालांकि धर्मनगरी अयोध्या में दशहरा मेला तो आयोजित नहीं किया जाता। लेकिन, शहर में दो जगह आयोजित रामलीलाओं की ओर से प्रतीकात्मक रूप से रावण दहन किया जाता है। वहीं फैजाबाद शहर में चौक के रामलीला मैदान व फतेहगंज पर रावण दहन आकर्षण का केंद्र होता है, साथ ही हैदरगंज, साहबगंज, कोठापार्चा पर भी रावण दहन किया जाता है। इनमें से चौक में रावण, मेघनाथ व कुंभकर्ण का पुतला तो फतेहगंज में सिर्फ रावण के पुतले का दहन किया जाता है।
वैसे तो जिले में 98 स्थानों पर रामलीला का मंचन व परदे पर दिखाई जाती हैं। इन सभी स्थानों पर रावण दहन होता है। जिसको खासतौर पर आसपास के लोग देखने आते हैं। इनमें खास शहर के श्रीरामजानकी रामलीला समिति चौक, फतेहगंज की रामलीला समिति, रूदौली के ख्वाजा हाल की रामलीला समिति, साहबगंज की रामलीला समिति व बीकापुर के कुरावन की रामलीला समिति है। बीते दिनों में रावण की लंबाई को लेकर रामलीला समितियों में काफी होड़ देखने को मिल रही है।
इस बार बाजी चौक की रामलीला समिति ने मारी है। यहां के रामलीला के ग्राउंड पर 40 फिट का रावण बनकर तैयार हो रहा है। इसके अलावा फतेहगंज व ख्वाजा हाल रूदौली में 25-25 फिट के रावण बनाकर तैयार किए जा रहे हैं। इसके अलावा अन्य समितियां व गांव के लोग मिलकर बुराई के प्रतीक रावण को जलाते हैं। बारून बाजार में विजयादशमी के दिन मैदान में एक बृहद मेले का आयोजन किया जाता है। ग्राम प्रधान हरी ने बताया कि मेले में रावण की 11 फुट पुतले का दहन किया जातर है। वहीं, कुरावन गांव में भी इसीदिन मेला आयोजन कर 16 फुट ऊंचे रावण का दहन किया जाता है।
चौक के टकसाल में रावण की सबसे ऊंचा पुतला बनाने वाले अजमतुल्लाह कहते हैं कि आज से लगभग 35 वर्ष पूर्व राजा अयोध्या की ओर से रावण का पुलता बनाने का आर्डर मिला था। उन्होंने तुरंत आर्डर बुक कर लिया लेकिन उन्हें रावण बनाने के बारे में कुछ पता नहीं था। इसके लिए उनके पिता ने राजा अयोध्या के लौटने पर उनको कड़ी फटकार लागाई थी।
वह बताते हैं कि आर्डर होने के कारण वह पूरी लगन से जुट गए, तीन बार खराब होने के बाद अंतत: रावण बनकर तैयार हो गया और जब वह अयोध्या लेकर पहुंचेे तो सबने रावण के पुतले की तारीफ की। वह बताते हैं कि तब से लेकर आज तक वह 700 से अधिक रावण बना चुके हैं। अब तक का सबसे ऊंचा रावण 60 फिट का एआईटी मनकापुर में बनाया है। इसके अलावा मुंबई, बस्ती, दिल्ली, सुल्तानपुर, गोंडा व बहराइच समेत दो दर्जन से अधिक जिलों में रावण बनाने जा चुके हैं। वह बताते हैं कि पिछले दो वर्षों से वृद्ध होने के कारण बाहर नहीं जा पा रहे हैं। वह बताते हैं कि यही उनकी कमाई का जरिया है, इसी के सहारे चार बच्चों को पाल रहे हैं।