ऑडिटर सीएमएसडी स्टोर से लेकर अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र तक आपूर्ति की गई दवाओं की गहनता से पड़ताल कर रहे हैं। ऑडिट टीम की निगाहें अस्पतालों में आपूर्ति और चिकित्सालयों में आने वाले मरीजों की संख्या पर भी है।
जिले में मार्च माह में स्वास्थ्य विभाग के अफसर करोड़ों के वारे-न्यारे कर गए।
राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के तहत 30 और 31 मार्च को वित्त एवं लेखाधिकारी से प्रपत्रों की जांच कराए बगैर वित्त एवं लेखा प्रबंधक (डैम) एसआर वर्मा ने पांच करोड़ का धन निकाल लिए। डैम के इस कारस्तानी का एनएचएम के नोडल अधिकारी डॉ. एके कनौजिया ने बखूबी साथ दिया।
पांच करोड़ के इस रुपये में संविदा कर्मियों का मानदेय और दवाओं की खरीद की गई है। दवाओं की खरीद और मानदेय का भुगतान करने से पूर्व प्रपत्रों की जांच नहीं कराए जाने से नाराज जिलाधिकारी ने एनएचएम के लेखा महा प्रबंधक से कार्य नहीं कराए जाने का निर्देश मुख्य चिकित्साधिकारी को दिया था।
साथ ही मामले की विस्तृत जांच के लिए मिशन निदेशक अमित घोष को भी पत्र लिखा था। दवाओं के खरीद में करोड़ों के घोटाले की पुष्टि तब और और होने लगी, जब सीएमएसडी स्टोर के पूर्व इंचार्ज फतेह बहादुर सिंह ने सीएमओ को पत्र लिख कर दवा खरीद की जांच कराए जाने की बात कही।
फतेहबहादुर ने अपने पत्र में साफ तौर पर लिखा है कि जो दवाएं एनआरएचएम हेड से खरीदी गईं। उन्हीं दवाओं को स्टेट हेड में खारिज किया गया है, और जो दवाएं स्टेट हेड से खरीद गई उसे एनआरएचएम हेड में भी दर्शाया गया है। इसी की पड़ताल के लिए ऑडिट टीम फर्म से सीएमएसडी स्टोर, सीएमएसडी स्टोर से पीएचसी, सीएचसी और अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र पर आपूर्ति की गई दवाओं का व्यौरा संकलित कर रही है।