मानदेय नहीं मिलने से खफा आशा बहुओं ने गुरुवार को सीएचसी में जमकर हंगामा किया। आक्रोशित आशाओं ने लिपिक को उसके कमरे में बंद कर दिया। आरोप लगाया कि लिपिक बिना घूस लिए डाटा फीडिंग नहीं करता है। सूचना पर पहुंचे कार्यवाहक अधीक्षक डॉ. फिरोज अहमद ने समझाकर आशाओं को शांत कराया और एक घंटे कमरे में बंद रहे लिपिक को मुक्त कराया।
बीकापुर सीएचसी से संबद्ध पुष्पलता, सरिता सिंह, पिंकी, सत्यभामा, मालती, सुमन, विजयलक्ष्मी, प्रेमलता आदि आशा बहुओं ने बताया कि नसबंदी, टीकाकरण और प्रसव सहित बैठकों का मानदेय नहीं दिया जा रहा है। न ही जननी सुरक्षा योजना के तहत मिलने वाले छह सौ रुपये का भुगतान किया जा रहा है।
अगर भुगतान होता भी है तो मात्र तीन सौ रुपये का। इसके अलावा सीएचसी के लिपिक ने जानबूझकर नसबंदी की फीडिंग नहीं की। कई बार अफसरों से शिकायत भी की गई लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। गुस्साई आशा बहुओं ने गुरुवार को लिपिक को उसके कमरे में बंद कर दिया और हंगामा करने लगीं।
सीएचसी के कार्यवाहक अधीक्षक डॉ. फिरोज अहमद का कहना है कि, बीसीपीएम अर्चना सिंह के ट्रेनिंग पर जाने से फीडिंग में थोड़ा विलंब हुआ है। जहां तक रही बात घूस मांगने की तो इसकी जांच कराई जा रही है। आशा बहुओं को शीघ्र ही पूरा मानदेय दिलाया जाएगा।