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नमो की जय-जयकार करते दिखेंगे तोगड़िया

Fri, 21 Jun 2013 05:30 AM IST
Faizabad
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अयोध्या। विहिप के अंतर्राष्ट्रीय कार्याध्यक्ष डॉ. प्रवीण भाई तोगड़िया जल्द ही गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की जय-जयकार करते दिखेंगे। इसके लिए वे संत समाज के लिए बनने जा रहे खास रथ पर सवार हो सकते हैं। मोदी से दूरी बनाने वाले तोगड़िया में यह बदलाव मिशन 2014 के तहत भाजपा को सत्ता में लाने के लिए आरएसएस के बड़े लक्ष्य का हिस्सा है। रामनगरी में चल रहे अमृत महोत्सव के तीसरे दिन गुरुवार को भी भाजपा-विहिप और धर्माचार्यों ने वाल्मीकि भवन में सजे प्रवचन मंच का पूरा उपयोग राममंदिर के मुद्दे को लेकर ही किया। कारसेवापुरम् में डटे विहिप के अंतर्राष्ट्रीय संरक्षक अशोक सिंघल पूरे दिन आरएसएस और भाजपा के शीर्ष नेताओं के संपर्क में रहे, उन्हें मोदी का पक्षधर माना जाता है, लिहाजा भाजपा के शीर्ष नेता लालकृष्ण आडवाणी के बाद नरेंद्र मोदी के नाम पर नाक सिकोड़ने वाले विहिप के अंतर्राष्ट्रीय कार्याध्यक्ष डॉ. प्रवीण भाई तोगड़िया को मनाने की जिम्मेदारी संभाली। सूत्रों का कहना है कि तोगड़िया बुधवार की शाम दिल्ली रवाना होने से पहले बड़े लक्ष्य के लिए निजी तल्खी छोड़ने की सलाह को मान गए। ताकीद की गई कि विहिप कार्यकर्ताओं की पहली पसंद मोदी ही हैं, उनकी हिंदुओं में बढ़ती स्वीकार्यता और हाल ही में आई सर्वे रिपोर्ट को ध्यान में रखें। रणनीति बनीं कि अब 25 अगस्त से 84 कोसी परिक्रमा कार्यक्रम के बाद 18 अक्तूबर को होनी वाली राममंदिर निर्माण की संकल्प सभा में ही संत समाज की देशभर में भेजने के लिए रथों पर सवार किया जाएगा। शुभारंभ तोगड़िया और सिंघल सरीखे नेता रामजन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास समेत प्रमुख धर्माचार्यों के नेतृत्व में राममंदिर बनाने वाली सरकार बनाने की हुंकार के साथ करेंगे। इसके लिए यहां रथ भी बनाने व सजाने की रणनीति बनाई गई, लेकिन इसे अत्यंत गुप्त रखा गया है। इसी रथ से भाजपा का नाम नहीं लेने का विहिप का व्रत भी टूटेगा और मोदी-मोदी की गूंज विहिप और संत करेंगे।
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संघ का फैसला विहिप से अलग नहीं: तोगड़िया
डॉ. प्रवीण भाई तोगड़िया ने नरेंद्र मोदी से तल्खी के सवाल पर कहा कि आरएसएस का निर्णय विहिप से अलग कैसे हो सकता है। लेकिन हिंदू तभी साथ देगा जब वे रामलला के सामने आकर मंदिर निर्माण के लिए सत्ता में आते ही कानून बनाने का वचन देंगे। बताया कि राममंदिर बनाने की तिथि अभी तय नहीं की गई है। 84 कोसी परिक्रमा में सिर्फ संतों का महाकुंभ होगा, इसके बाद देशभर में संतों-नेताओं का जनजागरण होगा।
रथ पर सवार हो सकते हैं मोदी
84 कोसी परिक्रमा के साख विहिप नेताओं की संतों के साथ रथयात्रा की तैयारी की आशंका से खुफिया विभाग चौकन्ना हो गया है। रामनगरी में कैंप कर रही तीन दर्जन खुफिया यूनिटों में रथ के स्वरूप और रणनीति का पता लगाने की सरगर्मी छाई हुई है। आशंका जताई जा रही है कि गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को अयोध्या बुलाया जा सकता है और उसी दिन प्रमुख संतों और विहिप नेताओं के साथ रथ का प्रयोग चुनावी अभियान के लिए होगा। खुफिया एजेंसियों में इस बात पर मतभेद है कि 84 कोसी परिक्रमा पैदल होती है, इसलिए रथ का प्रयोग वहां करने की कोई गुंजाइश होगी।
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