मंडलीय चिकित्सालय के निर्माण में कार्यदायी संस्था के खेल भी निराले हैं। अस्पताल के निर्माण में 95 फीसदी धन अवमुक्त हो चुका है मगर कार्यदायी संस्था ने तीन सौ बेड के इस अस्पताल के सिर्फ सौ बेड के भवन को ही हैंडओवर किया है।
कार्यदायी संस्था ने अभी तक विभाग को अस्पताल के स्टाफ का आवासीय परिसर भी नहीं हैंडओवर किया है। ऐसे में अस्पताल में तैनात कर्मचारी बाहर रहने के लिए मजबूर हैं।
जून 2008 में 33 करोड़ रुपये की लागत से तीन सौ बेड के मंडलीय अस्पताल की आधारशिला रखी गई थी। अस्पताल को मई 2011 तक हर हाल में स्वास्थ्य विभाग को हैंडओवर करना था। निर्धारित समय पूरा हुए भी लगभग पांच साल बीतने को हैं मगर अस्पताल का निर्माण पूरा नहीं हो सका।
अस्पताल में अभी भी दो सौ बेड के भवन का निर्माण होना बाकी है। हालांकि इस दौरान अस्पताल की लागत बढ़कर 54 करोड़ छह लाख रुपये हो गई। सरकार ने कार्यदायी संस्था को 51 करोड़ 34 लाख रुपये अवमुक्त कर दिया है।
यानी कार्यदायी संस्था को लागत का 95 फीसदी धन अवमुक्त कर दिया है, लेकिन अब तक स्वास्थ्य विभाग को एक तिहाई भवन भी हैंडओवर नहीं किया गया है। चिकित्सालय में अभी भी दो सौ बेड के वार्ड का निर्माण होना बाकी है।
कार्यदायी संस्था में अस्पताल का मुख्य भवन स्वास्थ्य विभाग को हैंडओवर करके शेष कार्यों से पल्ला झाड़ लिया है। 20 अगस्त 2015 को तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री अहमद हसन ने अस्पताल का औचक निरीक्षण किया तो उन्होंने कार्यदायी संस्था पर नाराजगी जताई थी।
उन्होंने हर हाल में अस्पताल का निर्माण पूरा कर विभाग को हैंडओवर करने का आदेश दिया था। मगर मंत्री के आदेश का भी कार्यदायी संस्था पर कोई असर नहीं हुआ।