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श्रीरामानंदाचार्य जयंती पर निकली भव्य शोभायात्रा

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श्रीरामानंदाचार्य जयंती पर निकाली भव्य शोभायात्रा
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अयोध्या। मणिराम दास छावनी से जगदगुरु श्रीरामानंदाचार्य की 718वीं जयंती पर विशाल शोभा यात्रा निकाली गई। इस अवसर पर श्रीरामजन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष और मणिराम दास छावनी के महंत नृत्य गोपाल दास ने कहा कि जगदगुरू स्वामी रामानंदाचार्य महाराज की भारतीय धर्म, दर्शन, साहित्य और संस्कृति के विकास के साथ ही वैष्णव भक्ति से संबद्ध वैचारिक क्रांति में महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उन्होंने वैष्णव भक्ति के महान संतों की श्रेष्ठ परंपरा को जीवंत किया। उन्हें आधुनिक भक्ति मार्ग का प्रचार करने वाला और वैष्णव साधु के रूप में स्वीकार किया जाता है।
महंत नृत्य गोपाल दास ने कहा कि आचार्य जी का संपूर्ण जीवन समाज, राष्ट्र और धर्म के उत्थान के लिये समर्पित रहा। वह हिंदू धर्म के उद्धारक के रूप में सदैव पूजित रहेंगे। उनकी शिष्य मंडली में जहां एक ओर कबीरदास, रैदास, सेननाई और पीपानरेश जैसे जातिपाति, छुआछूत, वैदिक कर्मकांड, मूर्तिपूजा के विरोधी निर्गुणवादी संत थे तो दूसरे पक्ष में अवतारवाद के पूर्ण समर्थक अर्चावतार मानकर मूर्तिपूजा करने वाले स्वामी अनंतानंद, भावानंद, सुरसुरानंद, नरहर्यानंद जैसे सगुणोपासक आचार्य भक्त भी उनके शिष्य थे।
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इस दौरान एक भव्य शोभा यात्रा मणिराम दास छावनी से निकाली गई जो हनुमानगढी, कनक भवन, अशर्फी भवन चौराहा, पोस्ट आफिस होते हुए अपने स्थान पर पहुंच कर समाप्त हुई। यात्रा में बड़ा स्थान के महंत देवेन्द्र प्रसादाचार्य, डॉ. रामानंद दास, कृपालु रामदास, पुनीत रामदास, महामंडलेश्वर प्रेमशंकर दास, रामशरण दास समेत अन्य मौजूद रहे। वहीं, राम नगरी के विभिन्न मंदिरों में रामानंदाचार्य की जयंती धूमधाम से मनाई गई। दशरथ महल बड़ा स्थान में बिंदुगाद्याचार्य स्वामी देवेंद्र प्रसादाचार्य की अध्यक्षता में रामानंदाचार्य की जयंती पर राम नाम संकीर्तन समेत अन्य आयोजन संपन्न हुआ। दर्शन भवन में डॉ. ममता शास्त्री के निर्देशन में नवाह पारायण का पाठ सहित भजन-कीर्तन का कार्यक्रम हुआ। रामवल्लभाकुंज, झुनकी घाट, कनक भवन, करुनानिधान भवन समेत अन्य मंदिरों में भी उत्सव मनाया गया।
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