400 विद्यार्थियों ने पुनर्मूल्यांकन के लिए किया आवेदन
केस-1 : गणित के तीन पेपर में पास, एक में मिला 01 अंक
प्रिया गौड़ झुनझुनवाला महाविद्यालय के बीएससी तृतीय वर्ष की छात्रा हैं। उसे गणित के दूसरे, तीसरे व चौथे पेपर में क्रमश: 41, 49 व 49 अंक मिले, जबकि पहले प्रशभन पत्र में मात्र एक अंक मिला है। छात्रा का तर्क है कि यह बात किसी कीमत पर गले नहीं उतरती है।
केस-2 : गणित प्रथम में मात्र 02 अंक, द्वितीय में मिला जीरो
साकेत महाविद्यालय के बीएससी तृतीय वर्ष के नियमित छात्र सत्यम पांडेय ने परीक्षा नियंत्रक को पत्र देकर बताया है कि उसे गणित के प्रथम पेपर में 02 व द्वितीय पेपर में जीरो नंबर दिए गए हैं। उसने अपने कापियों के पुनर्मूल्यांकन की बात कही है।
केस-3 : पेपर अच्छा हुआ फिर कैसे मिला जीरो
साकेत महाविद्यालय के ही बीएससी तृतीय वर्ष के नियमित छात्र रणविजय सिंह ने भी विवि को दिए गए पत्र में कहा है कि उसे गणित के द्वितीय प्रश्न पत्र में जीरो नंबर मिला है, जबकि उनके पेपर अच्छे हुए थे।
केस 4: इतने कम नंबर मिलना अविश्वसनीय
श्री बलदेव सिंह भाले सुलतान महाविद्यालय हलियापुर सुल्तानपुर के बीएससी तृतीय वर्ष के छात्र वैभव सिंह ने भी अपने पत्र में कहा है कि उन्हें गणित के प्रथम प्रश्न पत्र में जीरो व तृतीय प्रश्न पत्र में 05 व चतुर्थ प्रश्न पत्र में मात्र 06 नंबर मिले हैं। ये अविश्वसनीय है।
फैजाबाद। अवध विवि में परीक्षा मूल्यांकन में हुई गड़बड़ी के ऐसे मामले दो-चार नहीं, बल्कि हजारों में हैं। पुनर्मूल्यांकन के लिए उत्तर पुस्तिकाओं की सैंपलिंग के लिए मांगे गए आवेदन के पहले दिन ही 400 विद्यार्थियों ने आवेदन कर शिकायत दर्ज कराई है। छात्रों की शिकायतें देख विश्वविद्यालय प्रशासन भी दंग है। वहीं, कॉलेजों के शिक्षक-प्राचार्य और छात्रनेता भी विवि की मूल्यांकन प्रक्रिया पर सवाल उठा रहे हैं। सभी की मांग है कि बड़े पैमाने पर की गई गड़बड़ी जांच का विषय है न कि छात्रों से मोटी रकम वसूलकर पुनर्मूल्यांकन की प्रक्रिया का हिस्सा।
ध्यान रहे कि अवध विवि की स्नातक की परीक्षाओं में शामिल कुल तीन लाख 31 हजार 159 छात्रों में एक लाख 33 हजार 434 छात्र फेल हो गए। इनमें सबसे ज्यादा बुरी स्थिति बीएससी के छात्रों की रही। बीएससी प्रथम वर्ष में महज 43.01 प्रतिशत, द्वितीय वर्ष में 23.34 प्रतिशत व तृतीय वर्ष के छात्रों में मात्र 19.18 छात्र पास हुए। फेल हुए ज्यादातर छात्र पिछले वर्ष अच्छे नंबरों से पास हुए थे। उनका कहना है कि इस वर्ष भी उनके पेपर अच्छे हुए थे। इसके बावजूद परीक्षा परिणाम खराब होने से सवाल खड़ा होना वाजिब है। छात्र नेताओं का कहना है कि इस गड़बड़ी की जांच करने के लिए विवि प्रशासन को उच्चस्तरीय समिति बनानी चाहिए, जो इसकी जांच कर फेल हुए बच्चों को न्याय दिला सके साथ ही दोषियों के ऊपर कार्रवाई भी कर सके। वरना छात्र आंदोलन का रास्ता अपनाने को विवश होंगे।
जांच कराएं वीसी, पीड़ित छात्र पैसा क्यों दे: प्राचार्य
साकेत पीजी कॉलेज के प्राचार्य डॉ. अजय मोहन श्रीवास्तव का कहना है कि अवध विवि का परीक्षा परिणाम कई सवाल खड़ा कर रहा है। हमारे कॉलेज में तो कोई ऐसी गड़बड़ी सामने नहीं आई है, मगर स्ववित्तपोषित ज्यादातर कॉलेज के बच्चे रिजल्ट से पीड़ित हैं। उन्हें जिस विषय के एक पेपर में शून्य नंबर मिले हैं, उसी विषय के अन्य पेपर में अच्छे नंबर मिले हैं। यहीं नहीं साइंस व गणित जैसे विषय में एक, दो व पांच नंबर देना भी सवाल खड़ा करता है। वीसी व रजिस्ट्रार को छात्रों से पुनर्मूल्यांकन की फीस लेने के बजाय खुद जांच करानी चाहिए, आखिर गड़बड़ी मामले में पीड़ित पैसा क्यों दे। यह भी गौर करने की बात है कि कापी जांचने वालों में ज्यादातर स्व वित्तपोषित कॉलेज के शिक्षक थे।
शुरू हो गई जांच, पुनर्मूल्यांकन से सामने आएगा सच: कुलपति
विवि के कुलपति प्रो. मनोज दीक्षित का कहना है कि कोई भी शिक्षक किसी भी छात्र को शून्य अंक देने से पहले सौ बार सोचता है, लेकिन विद्यार्थियों के जो आवेदन सामने आए हैं उसमें किसी एक पेपर में शून्य तो अन्य में अच्छे या फर्स्ट क्लास अंक मिले हैं। इसे देखते हुए पूरी पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया सैंपल के रूप में मुफ्त कराई जा रही है। संबंधित छात्र के शून्य अंक और अधिकतम अंक वाली कॉपियों को गैर विवि के शिक्षक के पास भेजकर जांच कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इसकी रिपोर्ट आने के बाद जनरल मार्किंग के साथ यदि परीक्षक दोषी मिला तो उस पर कार्रवाई की जाएगी।