हर महिला को पहचाननी होगी वोट की ताकत
अयोध्या। मतदान की कीमत को समझें महिलाएं। हर महिला को वोट की ताकत पहचाननी होगी। महिलाओं को अपने मताधिकार का प्रयोग कर समाज में एक बदलाव की मुहिम शुरू करनी होगी।
अमर उजाला की मुहिम अपराजिता 100 मिलियन स्माइल्स के तहत अमर उजाला कार्यालय में आयोजित ‘संवाद’ में आंगनबाड़ी संगठन की महिलाओं ने संकल्प लिया कि हम अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे और क्षेत्र में महिलाओं को प्रेरित कर उन्हें पोलिंग बूथ तक ले जाएंगे।
सोनिका मिश्रा ने कहा कि वोट करना हमारा महत्वपूर्ण अधिकार है। यह हम सभी को समझना होगा। महिलाएं वोट करने से न चूकें। बाकी महिलाएं भी भी वोट करें इसके लिए हमें अपने आसपास और साथ ही सभी महिलाओं को प्रेरित करना चाहिए।
गीता यादव ने कहा कि हम महिलाओं में ही कमी है, जो वोट जैसे महत्वपूर्ण अधिकार को गंभीरता से नहीं लेतीं। सबसे पहले हम खुद को तैयार करें कि वोट जरूर करेंगे। इसके बाद दूसरों को भी वोट के लिए प्रेरित करें। हम बीएलओ हैं जो मतदान की रीढ़ हैं।
सोनी गुप्ता ने कहा कि हम जागरूकता के कार्यक्रम जारी रखने चाहिए। चाहे चुनाव हो या नहीं, चुनाव न होने पर भी जागरूक करते रहें तो लोग वोटिंग से पहले ज्यादा अच्छी तरह से तैयार हो सकेंगे। महिलाओं को वोट के लिए बाहर निकलना होगा।
सरिता सोनकर ने कहा कि महिलाओं को घर की जिम्मेदारियों से जब तक फुर्सत मिलती है तब तक वे थक जाती हैं और वोट करने में दिलचस्पी नहीं दिखातीं। यही सोच बदलनी है। वोटिंग के दिन वोट पहले, बाकी काम बाद में। यही महिलाओं को समझना है।
मालती यादव ने कहा कि महिलाएं अक्सर वोटिंग को महत्व नहीं देती हैं। मैं हर बार वोट करती हूं साथ ही दूसरों को भी साथ में लेकर जाती हूं वोट करने। हम सभी को भी यही तरीका अपनाना है। इससे कोई भी वोटिंग करने से नहीं चूकेगा।
मिथिलेश गुप्ता बोलीं कि महिलाओं को वोटिंग के लिए जागरूक होने के साथ यह भी समझना होगा कि यह अधिकार केवल उनका अपना है। परिवार के कहने पर वोट न दें। अपनी स्वेच्छा सेवोट दें। अपनी इच्छा बहुत मायने रखती हैं।
नीता मौर्या ने कहा कि अपने काम के सिलसिले में हम लोग घर-घर जाती हैं और बैठकें भी करती हैं। मैं तो महिलाओं को हमेशा कहती हूं कि पहले वोट करें, फिर घर के बाकी काम निपटाएं। कई साल में एक दिन तो यह मौका आता है।
रीता मौर्या बोलीं कि मैंने आज तक वोट करना कभी मिस नहीं किया। जो नहीं जाते हैं उनको जागरूक करने की शुरूआत अपने गली से ही करें। यदि सभी यही करने लग जाएंगे तो मतदान प्रतिशत अपने आप बढ़ जाएगा।
आराधना गौतम ने कहा कि हमारे पास बीएलओ का भी काम है। हम सभी महिलाओं को कहती हैं कि इसे त्यौहार की तरह लें। यह ऐसा त्यौहार है जो वर्षों बाद आता है। इसको यूं ही न जाने दें। मैं घर-घर वोटिंग के लिए प्रेरित करती हूं।
पुष्पा ने कहा कि ग्रामीण महिलाओं के मुकाबले शहरी महिलाएं वोट करने कम जाती हैं। हम आंगनबाड़ी कार्यकर्ता शहरी महिलाओं को वोटिंग के प्रति जागरूक कर सकते हैं। एक बार जो वोट कर लेगा, उसकी दिलचस्पी बढ़ जाएगी।