किसानों की हितैषी होने का दावा ठोंक रही योगी सरकार के निर्णयों को यहां का नलकूप विभाग पलीता लगा रहा है। जिले में 64 नलकूपों के बंद होने किसान से परेशान हैं तो विभाग शासन के निर्देशों को धरा पर उतारने को तैयार नहीं दिखता।
सूत्रों के अनुसार शासन से नलकूपों के रखरखाव और मरम्मत के लिए प्रति नलकूप प्रति वर्ष 40 हजार (कुल दो करोड़ 45 लाख 60 हजार रुपये) रुपये मिलता है। विभाग यह रकम उन नलकूपों के लिए भी प्राप्त करता है, जो कई वर्षों से पानी ही नहीं उगल रहे हैं।
जिले में ऐसे नलकूपों की संख्या एक दो नहीं, करीब दर्जन भर बतायी जा रही है। इसके अलावा विभाग बीच-बीच में नाली और दूसरे कार्यों के लिए शासन से अलग से धन अवमुक्त करा लेता है। पंप दोष, मोटर दोष, नाली दोष, स्टार्टर, केबल दोष, ट्रांसफार्मर व लाइन दोष में बंद चल रहे सरकारी नलकूपों के पानी न उगलने से किसानों की जायद की फसल चौपट हो रही है।
नलकूप विभाग के अधिशासी अभियंता मुरलीधर का फोन ही नहीं उठा। एक दूसरे अधिकारी ने फोन तो उठाया, पर नाम न लिखने की शर्त पर कहा कि क्षेत्र में इतने नलकूपों का खराब बताया जाना गलत है। स्टार्टर, पंप, केबल, नाली व मोटर दोष में करीब 32 नलकूप खराब हैं। विभाग मोटर दोष में बंद 15 नलकूपों को शीघ्र चलवाएगा।