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डॉक्टरों की भारी कमी से कराह रहीं चिकित्सा की बुनियादी सेवाएं

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जिले में डॉक्टरों की भारी कमी से चिकित्सा की बुनियादी सेवाएं ही अपाहिज नजर आ रही हैं। ग्रामीण क्षेत्र में सभी सीएचसी व पीएचसी पर संसाधनों का टोटा तो लंबे समय से है, ऊपर से स्टाफ की कमी समस्या को और बढ़ा रही है। सभी सीएचसी पर 93 विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी है। जबकि 30 अनाधिकृत रूप से लापता हैं। कहीं भी स्त्री रोग विशेषज्ञ की तैनाती नहीं की गई है, जिससे महिलाओं की हालत जरा सी गंभीर होने पर मुख्यालय या निजी चिकित्सालयों की शरण में जाना मजबूरी होती है।
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जिले की करीब 29 लाख आबादी के इलाज के लिए मुख्यालय पर 212 बेड के जिला अस्पताल के अलावा, राजकीय श्रीराम चिकित्सालय अयोध्या, दर्शननगर संयुक्त चिकित्सालय सहित 11 सीएचसी व 27 पीएचसी हैं। यहां इलाज के लिए संसाधनों का भी टोटा है, ऊपर से डॉक्टरों की हर पायदान पर भारी कमी से मौजूद संसाधनों का भी उपयोग नहीं हो पा रहा है। जिला अस्पताल में स्वीकृत 46 चिकित्सकों के सापेक्ष 28 की तैनाती है, जबकि 18 पद रिक्त हैं। सबसे बद्तर स्थिति सीएमओ के अधीन सीएचसी-पीएचसी की हैं। यहां कुल स्वीकृत 155 चिकित्सकों के सापेक्ष 112 की तैनाती थी। जिसमें 30 डॉक्टर वर्षों पूर्व अनाधिकृत रूप से लापता हो गए। जबकि 20 डॉक्टर लंबे समय से पीजी करने गए हैं। इस तरह मौजूदा समय में सिर्फ 62 डॉक्टर ही तैनात हैं। अस्पताल परिसर में आवास निर्मित होने के बावजूद भी अधिकांश जगह डॉक्टर ठहरते नहीं हैं, जिससे आकस्मिक सेवाएं भी यहां नहीं मिल पाती हैं। इसके अलावा कुल 12 स्त्री रोग विशेषज्ञ के सापेक्ष एक भी तैनाती नहीं है। बाल रोग विशेषज्ञ/फिजीशियन के 9 पद रिक्त हैं। रेडियोलॉजिस्ट के 11 पद रिक्त हैं। बेहोशी के 12 के सापेक्ष सिर्फ दो चिकित्सक तैनात हैं। अधिकांश जगह सर्जन भी मौजूद नहीं हैं, जिससे सामान्य प्रसव तो अनेक अव्यवस्थाओं के बाद हो जाता है लेकिन सीजर के लिए जिला मुख्यालय जाना ही मजबूरी होती है।


डॉक्टर के अभाव में नहीं चल रहा सौ शैय्या का अस्पताल
कुमारगंज के पिठला में करोड़ों की लागत से बना सौ शैय्या का अस्पताल डॉक्टरों के अभाव में नहीं चल पा रहा है। अस्पताल का भवन बनकर पूर्ण हो चुका है तथा समस्त चिकित्सीय उपकरण भी आ चुके हैं। यहां डॉक्टरों के 29 पद स्वीकृत हो चुके हैं, लेकिन बार-बार पत्राचार के बावजूद भी तैनाती नहीं हो रही है। जिससे अस्पताल संचालित नहीं हो रहा है। कुमारगंज के बंवा में चलने वाले प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की हालत अत्यंत दयनीय है। चिकित्सालय में अक्सर ताला ही बंद रहता है व नियुक्त डॉक्टर यदा-कदा ही आते हैं। वहीं, पीएचसी हैदरगंज लंबे समय से फार्मासिस्ट के सहारे ही संचालित है। यहां चिकित्सकों के दो पद स्वीकृत हैं, जिसके सापेक्ष एक भी तैनात नहीं हैं।
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सीएचसी सोहावल पर सर्जन, बाल रोग, एनेस्थीसिया, नेत्र सर्जन के पद खाली
सीएचसी सोहावल पर सर्जन, बाल रोग, एनेस्थीसिया, नेत्र सर्जन के पद खाली चल रहे हैं। यहां ऑपरेशन की सुविधा अरसे नहीं मिल पा रही है। दवाओं का भी टोटा रहता है। आयुष के आधा दर्जन चिकित्सक केवल स्कूलों में बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण करते हैं। प्रथम संदर्भन इकाई का दर्जा प्राप्त सीएचसी बीकापुर में एमडी के स्वीकृत सात पदों के सापेक्ष एक भी तैनात नहीं हैं। सर्जन व बाल रोग विशेषज्ञ भी नहीं हैं। महिला रोग विशेषज्ञ न होने से सामान्य प्रसव व प्राथमिक उपचार के बाद मरीजों के लिए खास व्यवस्था नहीं है।


सीएचसी तारुन पर सात डॉक्टरों की जगह सिर्फ अधीक्षक
तारुन ब्लॉक क्षेत्र की लगभग ढाई लाख आबादी के इलाज की जिम्मेदारी एक अधीक्षक व एक आयुष डॉक्टर के कंधों पर हैं। सीएचसी तारुन पर 7 डॉक्टरों के पद स्वीकृत हैं, लेकिन अकेले अधीक्षक की तैनाती है। यहां बाल रोग, सर्जन, दंत चिकित्सक, हड्डी के डॉक्टर नहीं है। स्वास्थ्य कार्यकर्ता पुरुष 15 व महिला के 26 पद रिक्त हैं। संविदा पर दो चिकित्सक डॉ. दिनेश कुमार एवं डॉ शिवकुमारी नियुक्त हैं। पीएचसी पनभरिया में चिकित्सकों के सापेक्ष एक की तैनाती हैं। सीएचसी हैदरगंज की बिल्डिंग बनकर तैयार है, लेकिन अभी तक किसी भी कर्मचारी की नियुक्ति नहीं हुई है।

जिले में डॉक्टरों की भारी कमी है। फिर भी संसाधनों की कमी व मैन पावर के अभाव में किसी तरह काम चलाया जा रहा है। डॉक्टरों की कमी के लिए समय-समय पर शासन को अवगत कराया जाता है।
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-डॉ. अशोक कुमार गुप्ता, सीएमओ फैजाबाद
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