पांच कलाकारों ने 55 मिनट की प्रस्तुति से लोगों को किया मंत्रमुग्ध
फैजाबाद। डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के स्वामी विवेकानंद सभागार में शुक्रवार को इंडोनेशियाई कलाकारों द्वारा संगीतमय रामलीला की प्रस्तुति से दर्शक मंत्रमुग्ध हो गए।
सभागार में उपस्थित अयोध्या के संत समाज के साथ अतिथिगण व छात्र-शिक्षक एकटक मूक अभिनय के भावों में खो से गए। कलाकारों की एक-एक भाव भंगिमा व नृृत्य मुद्रा पर सभागार लगातार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंजता रहा।
भारतीय पारंपरिक नृृत्यशैली कथकली, उड़सी, कत्थक इत्यादि की झलक लिए हुए इंडोनेशियाई नृृत्य शैली में कलाकारों ने सीता-रावण संवाद, सीताहरण, सीताजी की खोज, रावण-गरुण युद्ध, राम गरुण संवाद, रावण-हनुमान युद्ध व रावण वध जैसे दृृश्यों का मंचन किया।
रामलीला का नृृत्य शैली में मंचन मात्र पांच कलाकारों की टीम द्वारा किया गया। इंडोनेशियाई भाषा की रामायण के प्रसंगों का मंचन करते हुए कलाकारों ने अपनी अद्भुत भाव भंगिमा के साथ रामलीला के प्रस्तुतीकरण के साथ दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
लगभग 55 मिनट के इस प्रस्तुतीकरण में निदेशक अयोध्या शोध संस्थान, वाईपी सिंह ने एंकर की भूमिका निभाई। मंच पर चल रहे प्रसंगों का विवरण दर्शकों को दिया।
इस अवसर पर रावण की भूमिका निभाने वाले आई केतुत सुपर्णा ने कहा कि रामलीला का मंचन करने वाले सभी कलाकारों का जीवन आज धन्य हो गया, क्योंकि आज वह उस भूमि पर प्रस्तुतीकरण कर रहे हैं जिस भूमि पर श्रीराम पैदा हुए।
सांस्कृतिक रूप से भारत कितना समृद्ध : विधायक
इंडोनेशियाई रामलीला मंचन का उद्घाटन करते हुए मुख्य अतिथि नगर विधायक वेदप्रकाश गुप्ता ने कहा कि आज का कार्यक्रम यह बताने में सक्षम है कि सांस्कृतिक रूप से भारत कितना समृृद्ध है और उसकी परंपराएं विश्व के तमाम देशों की कितनी विस्तारित है।
कुलपति प्रो. मनोज दीक्षित ने बताया कि इंडोनेशिया में भारतीय संस्कृति की जडे़ कितनी गहरी हैं, इसका अंदाज इस बात से लगाया जा सकता है कि इंडोनेशिया में राष्ट्रपति आज भी श्रीराम की चरण पादुका की धूल की शपथ लेते हुए सत्ता ग्रहण करते हैं।
रामलीला की समाप्ति के उपरांत कुलपति ने सभी कलाकारों को विश्वविद्यालय परिवार की तरफ से स्मृृति चिन्ह एवं रामनामी प्रदान कर सम्मानित किया। इस दौरान महंत नृत्यगोपालदास ने सभी कलाकारों को आशीर्वाद भी दिया।