अयोध्या में चौदहकोसी परिक्रमा के साथ शुरू हुआ कार्तिक पूर्णिमा व परिक्रमा मेला शुक्रवार को पूरे शबाब पर पहुंच गया। गुरुवार की शाम शुरू हुई चौदह कोसी परिक्रमा पूरी हो गई। लगभग 46 किलोमीटर परिक्रमा पथ की परिधि में जुड़वा शहर मानव शृंखला से घिरा रहा। करीब 20 लाख श्रद्धालुओं ने चौदहकोसी परिक्रमा पूरी की। हालांकि परिक्रमा पथ पर प्रशासनिक दावे कई जगह तार-तार होते दिखे, परिक्रमार्थियों को दुश्वारियों का सामना करना पड़ा। परिक्रमा पूरी होने के साथ श्रद्धालुओं का सैलाब सरयू तट से प्रमुख मठ-मंदिरों में दर्शन-पूजन के लिए उमड़ने लगा, देर शाम तक दर्शनार्थियों की भीड़ से समूचा मेला क्षेत्र गुलजार रहा।
कार्तिक शुक्ल पक्ष अक्षय नवमी तिथि से शुरू होने वाला कार्तिक पूर्णिमा व परिक्रमा मेला गुरुवार की शाम ढलते ही चौदहकोसी परिक्रमा के साथ शुरू हुआ। हालांकि परिक्रमा आरंभ करने का मुहूर्त शाम सात बजकर 28 मिनट का था लेकिन सात बजते-बजते श्रद्धालुओं का कारवां परिक्रमा पथ पर उमड़ने लगा। मध्य रात्रि होते-होते लगभग 46 किलोमीटर से अधिक की परिधि में अयोध्या-फैजाबाद जुड़वा शहर को समेटे परिक्रमा पथ परिक्रमार्थियों की मानव शृंखला से बंध गया। एसपी सिटी आर.एस. गौतम ने बताया कि करीब 18 से 20 लाख श्रद्धालुओं ने परिक्रमा की है।
गुरुवार देर शाम से शुरू हुई परिक्रमा शुक्रवार को दोपहर 12 बजते-बजते कुछ थमी। परिक्रमा पूरी होते ही परिक्रमार्थियों की भीड़ पतित पावनी सरयू में डुबकी लगा स्नान-दान कर प्रमुख मंदिरों में दर्शन पूजन के लिए जुट गई। प्रसिद्ध नागेश्वरनाथ, हनुमानगढ़ी, कनक भवन के साथ श्रीराम जन्मभूमि पर भोर से शुरू हुआ दर्शन-पूजन का सिलसिला देर शाम तक जारी रहा। समूची नगरी श्रद्धालुओं के जयकारों से गूंजती रही। दूसरी बेला होते-होते मेला क्षेत्र से परिक्रमा व दर्शन-पूजन कर श्रद्धालुओं की वापसी शुरू होने लगी। रेलवे स्टेशन से बस स्टेशन परिसर तक श्रद्धालुओं से पटे रहे।