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मॉरीशस का दौरा करेगा विशेषज्ञों का दल

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मॉरीशस का दौरा करेगा विशेषज्ञों का दल
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अयोध्या। अयोध्या शोध संस्थान के निर्देशन में विशेषज्ञों का एक दल शीघ्र ही मॉरीशस देश का दौरा करेगा। वहां रामायण सेंटर की यात्रा कर वहां रामकथा से जुड़ी संभावनाओं को परखेगा। साथ ही भविष्य में सांस्कृतिक आदान-प्रदान की भी भूमिका तैयार करेगा। प्रदेश सरकार ने इस यात्रा के लिए अयोध्या शोध संस्थान को जिम्मेदारी सौंपी है।

अयोध्या शोध संस्थान के निदेशक डॉ. वाईपी सिंह ने बताया कि विगत दिनों मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यात्रा के दौरान मॉरीशस की रामायण संस्कृति के सांस्कृतिक आदान-प्रदान के लिए उत्तर प्रदेश सरकार के साथ समझौते की घोषणा की थी। इसके लिए प्रदेश सरकार ने मॉरीशस के दौरे पर विशेषज्ञों की एक टीम भेजने का निर्णय लिया है।
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जिसकी जिम्मेदारी अयोध्या शोध संस्थान को सौंपी गई है। शासन की ओर से इस आशय का पत्र भी संस्थान को प्रेषित किया जा चुका है। यह दल मॉरीशस का दौरा करेगा, वहां भगवान राम की जड़े और उनकी कथा से जुड़े संस्कारों को खोजने का कार्य होगा। मॉरीशस की रामलीलाओं के मंचन का रिहर्सल व जुड़े लोगों से जानकारियां हासिल कर उत्तर प्रदेश सरकार को सौंपी जाएगी।

इसके बाद दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक संबंधों को प्रगाढ़ करने पर चर्चा होगी। वे बताते हैं कि मॉरीशस में भगवान राम के व्यक्तित्व से भावी पीढ़ी को अवगत कराने के लिए सेंटर बनाया गया है। यहां हिंदू मूल्यों और रामायण के जीवन मूल्यों की शिक्षा देने का जो प्रबंध किया गया है, वह सराहनीय है।

बताया कि मॉरीशस और उत्तर प्रदेश के बीच समझौता होने के बाद दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक प्रगाढ़ता आएगी और रामकथा को और प्रभावपूर्ण बनाने और उसे जन-जन तक जोड़ने में भी सहायता मिलेगी। डॉ. वाईपी सिंह बताते हैं कि रामलीला विश्व के कई देशों में प्रचलित हैं। विश्व के लगभग 65 देशों में आज भी रामकथा का प्रचार-प्रसार रामलीला के माध्यम से किया जा रहा है।
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वेस्टइंडीज, मलेशिया, सूरीनाम, श्रीलंका, फिजी, न्यूजीलैंड, लाओस, म्यांमार, थाईलैंड, कंबोडिया, वियतनाम समेत दुनिया भर के 65 देशों में रामलीला का मंचन होता है। हिंदी के प्रसिद्ध विद्वान फादर कामिल बुल्के ने 1982 में अपने एक लेख में कहा था कि वियतनाम से इंडोनेशिया तक ये कथा फैली है। भारत में करीब सौ तरह की रामलीलाएं होती हैं।
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