अयोध्या। सर्दी ने सितम ढाना शुरू कर दिया है। ठंड से लोग बेहाल हैं तो वहीं मंदिरों में विराजमान भगवान भी इससे अछूते नहीं हैं। भगवान को भी ठंड लग रही है।
इससे बचाने के यत्न किए जा रहे हैं। श्रंगार से राग-भोग में भगवान को ठंडक से बचाने के लिए ऊनी कपड़े, गर्म भोज्य पदार्थ व अंगीठी तक रखी जा रही है। बजरंगबली की प्रधानतम पीठ हनुमानगढ़ी में भगवान को रजाई की ओट में रखा गया है।
दशरथमहल बड़ास्थान में भी धनुषधारी भगवान को कंबल की ओट में रखा जा रहा है। सुबह आरती, पूजन के बाद भगवान को कंबल ओढ़ा दिया जाता है।
शाम होते ही भगवान रजाई की ओट में आ जाते हैं। मंदिर के महंत बिंदुगाद्याचार्य स्वामी देवेंद्र प्रसादाचार्य कहते हैं कि वैसे तो भगवान धनुषधारी सृष्टि के संचालक हैं लेकिन यह भगवान के प्रति भक्त की आत्मीयता का परिचायक है।
इसी भाव से गर्मी में भगवान के लिए कूलर, पंखे व फूलबंग्ला झांकी का आयोजन किया जाता है। ठंडक में रजाई, कंबल व अंगीठी जलाकर भगवान को ठंड से बचाने का प्रयास होता है।
कनकभवन मंदिर में विराजमान भगवान के विग्रह को ठंड से बचाने के लिए दिन में कंबल ओढ़ाकर रखा जा रहा है। शाम को अंगीठी जलाई जाती है।
रसिक पीठ झुनकीघाट में भगवान को ठंड से बचाने के लिए विशेष सतर्कता बरती जा रही है। राग-भोग के बाद प्रतिदिन भगवान को ऊनी कपड़े पहनाए जा रहे हैं।
महंत करूणानिधान शरण के अनुसार साधक के लिए आराध्य वैसे ही हैं, जैसे वह स्वयं अनुभूति करता है, इसलिए मौसम के अनुरूप आराध्य के लिए भी व्यवस्था की जाती है।
श्रीरामबल्लभाकुंज में भी विराजमान राम-सीता के विग्रह को आचमन तक गर्म पानी से कराया जा रहा है। अधिकारी राजकुमार दास बताते हैं कि आराध्य को ठंड न लगे इस भाव से दिन में कंबल व रात में मखमली रजाई ओढ़ाई जा रही है।
इसी प्रकार मणिरामदास जी की छावनी, लक्ष्मण किला, बिड़ला मंदिर, दर्शनभवन, हरिधाम गोपाल मंदिर, जानकीघाट बड़ास्थान सहित अन्य मंदिरों में भी आराध्य को ठंड से बचाने के लिए यत्न किए जा रहे हैं।