फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

रामनगरी में आज से गूंजेंगें देवी मां के जयकारे

विज्ञापन
विज्ञापन
रामनगरी में आज से गूंजेंगे देवी मां के जयकारे
विज्ञापन

अयोध्या। हिंदू नव संवत्सर चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के साथ ही शनिवार को वासंतिक नवरात्र शुरू हो जाएंगे। पहले दिन घरों और मंदिरों में मां के शैलपुत्री रूप की आराधना होगी। श्कलश स्थापना का अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:30 बजे से 12:18 बजे तक रहेगा।

इसके अलावा सुबह 7:20 बजे से दोपहर 2:58 बजे तक भी कलश स्थापना की जा सकेगी। शहर के तमाम देवी मंदिरों में नवरात्र पर्व को लेकर तैयारियां अंतिम चरण में हैं। पर्व को लेकर देवी मंदिरों को सजाया एवं संवारा जा रहा है।
विज्ञापन


पंडित कौशल्यानंदन वर्धन ने बताया कि इस बार नवरात्र आठ दिनों का ही है। अष्टमी एवं नवमी तिथि एक ही दिन मनाई जाएगी। पहला और आखिरी व्रत रखने वाले 12 अप्रैल को व्रत रहकर 13 अप्रैल को पारण कर सकते हैं।

बताया कि परिधावी संवत्सर व वासंतिक नवरात्र की शुरूआत चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को कर्क लग्न, रेवती नक्षत्र, ऐंद्र योग व शनिवार दिन और मीन के चंद्रमा में हो रहा है।

परिधावी संवत्सर व वासंतिक नवरात्र के योगानुसार मेष, वृष, मिथुन, सिंह, कन्या, तुला, धनु, मकर, कुंभ राशि जातकों को समय-समय पर अच्छे फल मिलते रहेंगे। नवरात्र के शुभारंभ के साथ ही हिंदू नववर्ष भी शुरू हो जाएगा।

नववर्ष चेतना समिति के तत्वाधान में 6 अप्रैल की सुबह सरयू आरतीघाट पर उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देकर नव संवत्सर का भव्य स्वागत किया जाएगा।

समिति के संयोजक महंत गिरीशपति त्रिपाठी ने बताया कि शाम पांच बजे अवध विश्वविद्यालय में सांस्कृतिक संध्या एवं गोष्ठी का आयोजन होगा। पंडित कौशल्यानंदन ने बताया कि घट स्थापना से पूर्व पूजा स्थल को लीपने के बाद स्वच्छ मिट्टी से वेदी बनाकर उसमें सात प्रकार के अनाज या जौ-गेहूं को बोना चाहिए।

इसके बाद उसमें मिट्टी या धातु का कलश स्थापित करना चाहिए। देवी प्रतिमा स्थापित करने के बाद घट पर आम के पल्लव और उसके ऊपर अनाज की कटोरी रखकर दीपक को विराजना चाहिए।

नवरात्र पर्व पर शहर के देवी मंदिरों में प्रथम दिने से लेकर नवमी तिथि तक भक्तों का तांता लगा रहता है। माता पार्वती द्वारा स्थापित छोटी देवकाली मंदिर में तो नवरात्र भर भक्तों की भीड़ जमी रहती है।
विज्ञापन


पुजारी अजय द्विवेदी ने बताया कि मंदिर के पाट सुबह चार बजे खुल जाऐंगे। सुबह 6 बजे और रात 8 बजे प्रतिदिन 1051 बत्ती की महाआरती होगी।

इसी तरह भगवान राम की कुलदेवी मानी जाने वाली बड़ी देवकाली मंदिर, जालपा देवी मंदिर, हट्टी महारानी मंदिर, शीतला माता मंदिर, कामाख्या देवी मंदिर, मरी माता मंदिर सहित अन्य देवी मंदिरों पर धार्मिक अनुष्ठान हवन, पूजन, जागरण आदि का कार्यक्रम होते हैं।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें