सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद शिक्षामित्र से सहायक शिक्षक बने लोगों में हर्ष का माहौल तो है लेकिन इनमें से करीब 1200 सहायक शिक्षक ऐसे हैं जिन्हें वेतन पाने के लिए अभी इंतजार करना पड़ेगा।
वेतन भुगतान का आदेश हुआ भी तो इन्हें तत्काल आर्थिक लाभ नहीं होगा। इसके पीछे प्रमुख कारण शिक्षामित्र से शिक्षक पद पर समायोजित हुए अध्यापकों के शैक्षिक दस्तावेजों के सत्यापन में लापरवाही बरतना है।
शैक्षिक दस्तावेजों के सत्यापन बगैर वेतन भुगतान नहीं हो सकता है। जिले में प्रथम चरण में 797 शिक्षामित्रों का सहायक शिक्षक पद पर समायोजन एक अगस्त 2014 को हुआ।
इसमें से ज्यादातर के दस्तावेजों का सत्यापन पूरा होने के बाद इन्हें वेतन मिलना शुरू हो गया। दूसरे चरण में 1200 शिक्षामित्र एक मई 2015 को समायोजित हुए लेकिन इन्हें वेतन भुगतान नहीं शुरू हुआ।
इसकी वजह शैक्षिक दस्तावेजों का सत्यापन कार्य अधूरा होना है। विभागीय नियम है कि नियुक्ति तिथि से 90 दिन के भीतर सत्यापन कार्य पूरा कराना चाहिए लेकिन द्वितीय चरण में नियुक्त हुए सहायक अध्यापकों को पढ़ाते हुए सात माह से ज्यादा हो गए फिर भी सत्यापन प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई।
हैरिंग्टनगंज के प्रा. वि. रनापुर की एकता सिंह, अमानीगंज के प्रा. वि. तुलापुर के अर्जुन भारती, हैरिंग्टनगंज के प्रा.वि. पडनीतारा की शर्मिला शर्मा, प्रा.वि. जासरपुर की आराधना यादव आदि शिक्षक-शिक्षिकाओं को सात माह पढ़ाने के बाद भी वेतन भुगतान नहीं हुआ है।
ऐसे में इन लोगों को आर्थिक दुश्वारियों से गुजरना पड़ रहा है। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी प्रदीप कुमार द्विवेदी ने कहा कि विभागीय स्तर से सत्यापन के लिए दस्तावेजों को भेजा जा चुका है। उम्मीद है कि शीघ्र ही प्रक्रिया पूरी हो जाएगी।