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अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर विशेष...

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अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर विशेष...
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फैजाबाद। मानवता की मूर्तिवती, तू भव्य-भूषण भंडार। दया, क्षमा, ममता की आकार, विश्व प्रेम की है आधार। नारी के सम्मान में किसी कवि से लिखी गई यह पंक्ति सच है। समय बदलने के साथ आज तमाम सामाजिक बेड़ियों और विपरीत परिस्थितियों के बावजूद महिलाएं लगातार आगे बढ़ रही हैं। पढ़ाई-लिखाई, नौकरी, खेल और कारोबार के क्षेत्र में महिलाओं ने न सिर्फ चुनौती को स्वीकार किया है, बल्कि नई इबारत भी गढ़ी है। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर ऐसी ही जिले की महिलाओं की मेहनत और समर्पण पर पेश है रिपोर्ट..

अवध में पुस्तक संस्कृति की संवाहक बनी रीता खत्री
फैजाबाद। शहर की बजाजा निवासी रीता खत्री बंगाल के जिस परिवार से ताल्लुक रखती है, उसी का असर है कि फैजाबाद में उनके आने के बाद इस शहर में उन्होंने पुस्तक संस्कृति को स्थापित करने की कोशिश की। एक दशक पहले पुस्तक मेले के रूप में हुई छोटी सी शुरुआत अब बड़ा रूप ग्रहण कर चुकी है। अदबी जगत की नामचीन हस्तियों से हर वर्ष यहां के लोगों को रू-ब-रू होने का अवसर मिल जाता है। वैसे तो अवध की इस पुरानी राजधानी फैजाबाद में अनीस चकबस्त लाइब्रेरी, राजकीय पुस्तकालय आदि पहले से है लेकिन अनीस चकबस्त तो सिर्फ नामभर का रह गया। राजकीय पुस्तकालय में प्राचीनता तो खूब है लेकिन उसमें आधुनिकता की कमी है। इस रिक्तता को वर्ष 2003 में सिविल लाइंस क्षेत्र में खुले नारायण दास खत्री स्मृति अध्ययन केंद्र भर रहा है। रीता खत्री ने वर्ष 2005 में फैजाबाद पुस्तक मेला की शुरूआत की जो अवध क्षेत्र की एक खास पहचान बन चुका है। अभी तक पुस्तकालय और पुस्तक मेले में विष्णुकांत शास्त्री, मंगलेश डबराल, कैलाश वाजपेई, भरत तिवारी ‘शब्द मित्र’, डॉ. विजय बहादुर सिंह, रवि भट्ट, जफर आगा, अनूप जलोटा, हिमांशु जोशी, अनुपम मिश्र, अशोक चक्रधर, सुधाकर अदीब, गुलजार, चित्रा मुदगल, जस्टिस जीएन रे, सुबोध कांत सहाय, रवींद्र कालिया, ममता कालिया, नासिरा शर्मा आदि नामचीन हस्तिया आ चुकी हैं। जिनसे स्थानीय लोगों ने संवाद कायम कर अपनी जिज्ञासाओं को शांत किया। गौरतलब है कि रीता खत्री फिल्म सेंसर बोर्ड व दूरदर्शन एवं आकाशवाणी की सलाहकार समिति की सदस्य रह चुकी हैं। रीता कहतीं हैं कि पुस्तकालय और पुस्तक मेला के जरिए अवध में किताबों के प्रति लोगों की जेहन में ज्यादा जुड़ाव हो गया है। किताब नहीं है तो घर आत्माविहीन जैसा है। मुझे खुशी होती है कि अब यहां के घरों में पहले से ज्यादा किताबें दिखती है। यहीं हमारी सफलता है।
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दिव्यांगों की सेवा को समर्पित डॉ. रानी अवस्थी
अपने काम से सामाजिक बदलाव लाने का प्रयास करने वाली डॉ. रानी अवस्थी अब किसी परिचय की मोहताज नहीं है। मंद बुद्धि व मूक बधिरों का भविष्य संवारना अपने जीवन का लक्ष्य बना चुकीं डॉ. अवस्थी 30 से अधिक पुरस्कार प्राप्त कर चुकी हैं। जिसमें से तीन राज्य स्तरीय है। कहती हैं कि इस काम में पहले तमाम बाधाएं आई, लेकिन हमने हमेशा अपने संकल्प पर भरोसा किया। आज भी महिलाएं जो कुछ भी ठान लें तो उसे पूरा कर सकती हैं। अब दिव्यागों का पालन पोषण कर अपने को गौरवांवित महसूस करती हैं।

दानवीर के. रानी शर्मा ने का कोई जवाब नहीं
नाम कृष्णा रानी शर्मा उर्फ के रानी शर्मा उम्र लगभग 92 वर्ष, पति स्व. शिवलाल शर्मा। नगर के तुलसी नगर क्षेत्र की निवासी के रानी शर्मा जिले की समर्पित समाजसेविका के रूप में जानी जाती हैं। चार-पांच दशकों से वह नगर में महिलाओं की शिक्षा व स्वास्थ्य की बेहतरी के लिए अग्रणी भूमिका निभाती रही हैं। समाज के प्रति उनके समर्पण का ही परिणाम रहा कि उन्होंने तुलसी कन्या प्राथमिक विद्यालय की स्थापना की। धीरे-धीरे इंटर कॉलेज तक की सुविधा उपलब्ध कराकर सरकार को दान दे दिया। जो अब राजकीय तुलसी कन्या इंटर कॉलेज के रूप में बालिकाओं को शिक्षा प्रदान कर रहा है, जो आज अयोध्या शहर का इकलौता महिला इंटर कॉलेज है। पास ही स्थित सरस्वती शिशु मंदिर के लिए भी उन्होंने भूमि दान में दे दी है। साथ ही महिला स्वास्थ्य की बेहतरी के लिए 25 बेड की सुविधा वाला तुलसी महिला चिकित्सालय की स्थापना की, बाद में इसे भी सरकार को दान दे दिया। जो राजकीय तुलसी महिला चिकित्सालय के रूप में स्थापित है। नयाघाट स्थित राजकीय तुलसी उद्यान पार्क को भी उन्होंने सरकार को दान दिया है।

युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बनीं सीमा
अयोध्या के नई कॉलोनी दंत धावन कुंड निवासी 23 वर्षीय सीमा पांडेय ने वेट लिफ्टिंग में राष्ट्रीय स्तर पर नाम कमाकर जिले का नाम रोशन किया है। अयोध्या में पर्यटकों के लिए गाइड का काम करने वाले भवननाथ पांडेय की तीन भाई और पांच बहनों में तीसरे नंबर की बेटी सीमा अपने घर में अति सीमित संसाधनों के बाद भी कुछ करने की इच्छा रखती थी। उसकी इच्छा व लगन का देखते हुए उनके पिता ने अपने परिवार का पेट काटकर उसे गोरखपुर स्पोर्ट्स कॉलेज में दाखिला दिलवाया। अभी हाल ही में महाराष्ट्र के नागपुर में 19 जनवरी से 23 जनवरी तक चले इंडियन पावर लिफ्टिंग जूनियर चैंपियनशिप में सीमा पांडेय ने तीन क्विंटल 85 किलो का वेट उठा कर गोल्ड मेडल जीता। आठ साल से वेटलिफ्टिंग में अपनी किस्मत आजमा रही सीमा देश के आंध्र प्रदेश, केरल, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में चैंपियनशिप जीतकर फैजाबाद जिले का मान बढ़ा चुकी है। केंद्र और प्रदेश सरकार से किसी तरह की मदद नहीं मिलने के बाद भी सीमा ओलंपिक तक जाने का इरादा रखती है।

लगातार नौ बार नेशनल खेलकर प्रिया बनी स्टार
शहर के कनौसा कॉन्वेंट स्कूल की छात्रा 19 वर्षीय प्रिया आज जिले में जाना पहचाना नाम है। सब जूनियर, जूनियर व सीनियर स्तर पर राष्ट्रीय टेनिस बाल क्रिकेट प्रतियोगिता में लगातार 9 वर्ष यूपी टीम का प्रतिनिधित्व करने वाली प्रिया हसनू कटरा मोहल्ले के एक साधारण परिवार से संबंध रखती है। पिता की मौत के बाद उसकी मां तीन बहनों और तीन भाइयों का पालन पोषण कर रही है। सीमित संसाधन के बाद भी प्रिया ने हार नहीं मानी, स्कूल में शिक्षकों के सहयोग के चलते उसने टेनिस बाल क्रिकेट खेलना शुरू किया। उसके बेहतरीन खेल के बदौलत अभी हाल ही में यूपी की टीम ने राजस्थान के दौसा में हुए 28वीं राष्ट्रीय सीनियर महिला टेनिस बाल क्रिकेट प्रतियोगिता में दूसरा स्थान प्राप्त किया है। इसके अलावा हरियाणा में हुई 25वीं जूनियर नेशनल, आगरा में आयोजित 27वीं सीनियर नेशनल टेनिस बाल क्रिकेट प्रतियोगिता में उसने शानदार प्रदर्शन किया। हालांकि इस प्रतियोगिता का देश में बहुत स्कोप नहीं है लेकिन प्रिया का मानना है कि इससे उन्हें बहुत कुछ सीखने को मिला है वो आने वाले दिनों में भारतीय महिला क्रिकेट टीम की सदस्य बनना चाहती है।

बेहतरीन कार्य के लिए दो प्रधानों को सीएम करेंगे सम्मानित
फैजाबाद। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर गुरुवार को लखनऊ में आयोजित एक समारोह में जनपद की दो महिलाएं भी सम्मानित की जाएंगे। इनमें रुदौली विकासखंड के गांव सरायमुगल की प्रधान नेहा सिंह व रौजागांव की ग्राम पंचायत जलायपुर की स्वच्छाग्रही दीप कुमारी शामिल हैं।

हार नहीं मानूंगी : नेहा
सराय मुगल की ग्राम प्रधान नेहा सिंह का कहना है कि वह हार नहीं मानेंगी। रेडियों पर स्वच्छ भारत मिशन के विज्ञापन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लोगों को शौचालय बनवाने, उसका प्रयोग करने की बात करने और खुले में शौच न करने की बात कह रहे थे। पहले तो यह उनकी समझ में नहीं आया। गांव के सचिव ने यह बात विस्तार से बताया तो बात समझ में आ गई। कहती हैं कि कई बार लोग इसका शिकार होते हैं। बच्चे खेलते-खेलते इसमें गिर जाते हैं। कहती हैं कि यह सामाजिक बुराई ही नहीं एक कलंक की तरह है। उन्होँने निश्चय किया कि इस कलंक मिटाकर रहेंगी। सीडीओ से संपर्क किया। पांच दिवसीय स्वच्छता कार्यक्रम आयोजित कराया। इसके बाद उनकी दिनचर्या बदल गई। सुबह जल्दी उठना, फालोअप करना और लोगों को शौचालय बनवाने के लिए प्रेरित करना। उनका रोज का यही काम हो गया। उनके प्रयास से ग्राम पंचायत का राजस्व ग्राम सिपाहभट्ट ओडीएफ हो गया। वह कहती हैं कि जल्दी ही वह पूरे गांव को खुले में शौच मुक्त कराएंगी।
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कुछ कर दिखाना है : दीप कुमारी
विकासखंड रुदौली की ग्राम पंचायत जलायपुर की स्वच्छाग्रही दीप कुमारी ने अपनी दृढ़ इच्छा शक्ति और आत्म विश्वास से ऐसा कर दिखाया कि जिससे वह दूसरों के लिए आदर्श बन गई। कहती हैं कि एक दिन उनको किसी ने बताया कि स्वच्छ भारत मिशन के तहत स्वेच्छाग्रही पद पर भर्ती हो रही है। फार्म भरने और साक्षात्कार के बाद चयन भी हो गया। इसके बाद उन्होंने प्रशिक्षण लिया। बताया कि गांव में जागरुकता लाने के दौरान कुछ लोगों ने शराब पीकर बदसलूकी करने की कोशिश की। कहती है कि एक बार तो लगा कि लोगों को खुले में शौच न करने के लिए समझा पाना उनके बस की बात नहीं है। चिंतन के बाद मां की नसीहत कोई भी काम आसान नहीं होता है संघर्ष तो करना पड़ता है। उनको लग गई फिर उन्होंने पक्के इरादे के साथ आगे बढ़ी और पांच गांवों को खुले में शौच मुक्त करा दिया।
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