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1.14 लाख बच्चों को कागज पर पिला दिया दूध

Wed, 26 Aug 2015 01:08 AM IST
फैजाबाद/अमर उजाला ब्यूरो
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फिर भी बीएसए, एमडीएम प्रभारी और एबीएसए ने कागजों में फर्जीवाड़ा कर 90. 53 फीसदी परिषदीय स्कूलों में 1.14 लाख बच्चों को दूध पिलाने की रिपोर्ट शासन को भेज दी।
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इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि दूध के नाम पर जब शासन से धन आवंटन होगा तो इसका बंदरबांट कैसे हो सकता है। हालांकि अभी शिक्षा विभाग, प्रधान और प्रधानाध्यापक दूध के लिए फूटी कौड़ी नहीं मिलने का रोना रो रहे हैं। इसके लिए चुनावी मौसम होने से प्रधानों को ही जेब ढीली करनी पड़ रही है।

 
मुख्यमंत्री की खास प्राथमिकता में शामिल परिषदीय स्कूलों के बच्चों को हर सप्ताह बुधवार को 200 एमएल दूध देने का आदेश है। बेसिक शिक्षा सचिव की ओर से 24 जून को ही आदेश दिए जा चुके थे कि यदि किसी बुधवार को अवकाश होगा। तो स्कूल खुलने पर दूध देना अनिवार्य होगा।
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मगर इस आदेश से यहां अधिकारी से लेकर प्रधानाध्यापक तक अंजान रहे। लिहाजा बुधवार को नागपंचमी के कारण स्कूल बंद होने पर गुरुवार को दूध पिलाने के लिए आदेश उसी दिन बेसिक शिक्षा अधिकारी ने जारी किया।

हालत यह रही कि इससे जिले के ज्यादातर स्कूल के जिम्मेदार इससे अंजान रहे। गुरुवार को दूध पिलाने से संबंधित सूचनाओं का अभाव था। बताते हैं कि बीएसए प्रदीप कुमार द्विवेदी की ओर से गुरुवार को आदेश जारी हुआ।

जिसके कारण उनके आदेश की सूचना ब्लॉक, बीआरसी और एझ्नपीआरसी होते हुए स्कूलों तक पहुंचने में देरी हो गई। यह बात दीगर है कि बच्चों का दूध से भले पेट न भरा हो।

लेकिन विभाग के करामाती बाबुओं ने उनके आकाओं ने कागजों का पेट जरूर भर दिया। जिले में कुल 2200 प्राइमरी व जूनियर हाईस्कूलों में दूध पिलाने को लेकर बीएसए दफ्तर ने शासन को भेजी रिपोर्ट में 90.53 प्रतिशत स्कूलों में दूध पिलाने का दावा किया है।

हालांकि जिन भी विकास खंडों में दूध पिलाने की बाबत जानकारी हासिल की गई। वहां पर कुछ स्कूलों को छोड़कर ज्यादातर जगहों से दूध के बाबत आदेश की जानकारी नहीं होने की बात कही गई।

बीकापुर, तारुन, शुजागंज प्रतिनिधि सेे मिली रिपोर्ट बता रही है कि गुरुवार को सूचना के अभाव के कारण ज्यादातर स्कूलों में दूध नहीं पिलाया गया। वहीं मध्यान्ह् भोजन योजना के जिला समन्वयक विनय त्रिपाठी ने दावा किया कि जिले के 2200 स्कूलों में 90.53 प्रतिशत स्कूलों में दूध पिलाया गया। सिर्फ 57 स्कूलों में ही बच्चों को दूध नहीं मिल पाया।

तारुन ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय पिछौरा, प्राथमिक विद्यालय पिछौरा खास और प्राथमिक विद्यालय बेलगरा में दूध नहीं पिलाया गया। प्राथमिक विद्यालय बेलगरा के प्रधानाध्यापक राजेश दुबे ने कहा कि दुधिए ने दूध देने से मना कर दिया।

उनको डर है कि यदि बच्चों की तबियत खराब हुई तो उसके ऊपर जिम्मेदारी लाद दी जाएगी। जबकि प्राथमिक विद्यालय फखरपुर के प्रधानाध्यापक अशोक सिंह रघुवंशी ने कहा कि नागपंचमी के अगले दिन दूध पिलाने के बाबत आदेश तो नहीं मिला।

लेकिन गुरुवार को सुबह पौने नौ बजे एनपीआरसी अरुण वर्मा ने टेलीफोन से सूचना दी। उधर, खंड शिक्षा अधिकारी तारुन ने कहा कि सभी स्कूलों में दूध पिलाया गया। यदि कहीं पर कोई गुरुवार को दूध नहीं पिलाने की बात कर रहा है तो वह झूठ बोल रहा है।

बीकापुर ब्लॉक के प्राथमिक स्कूल सोनखरी में गुरुवार को नामांकित 106 बच्चों में 50 आए हुए थे। यहां की प्रधानाध्यापिका नुक्तदुल निशां ने बताया कि गुरुवार को दूध पिलाने की व्यवस्था नहीं हो सकी।

यही हाल प्राथमिक स्कूल जलालपुर माफी और परोमा का भी रहा। जलालपुर माफी के प्रधानाध्यापक अरविंद गौर व परोमा के प्रधानाध्यापक अशोक कुमार सोनी है।

इन दोनों स्कूलों में छात्रों की तादात अच्छी खासी है। लेकिन उन्हें दूध नहीं मिल पाया। खंड शिक्षा अधिकारी बीकापुर कमला प्रसाद ने कहा कि बीएसए की ओर से आदेश आया था, स्कूलों में सूचना भिजवाई गई। जहां दूध नहीं पिलाया गया, वहां की जांच करेंगे।

रुदौली ब्लॉक के प्राथमिक स्कूल हैदरगंज शहबाजपुर के बच्चों को दूध नहीं मिला। जबकि प्राथमिक स्कूल सुलेमानपुर में प्रधानी चुनाव के कारण दूध पिलाया गया।

शहबाजपुर की प्रधानाध्यापिका ममता सिंह ने कहा कि ग्राम प्रधान की वजह से दूध नहीं मिल पा रहा है। जबकि सुलेमानपुर के प्रधानाध्यापक अहमद गयास ने कहा कि दूध पिलाया गया। यहां के प्रधान श्रीकृष्ण ने बताया कि कोई आदेश नहीं आया था। पंचायत चुनाव नजदीक है, जिसके कारण दूध पिलाने की व्यवस्था कर दी।

जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी प्रदीप कुमार द्विवेदी ने कहा कि दूध पिलाने के लिए जो शासनादेश जारी हुआ। उसी में कहा गया है कि यदि बुधवार को अवकाश है तो अगले कार्य दिवस में दूध पिलाया जाएगा। सभी शिक्षकों को इसकी जानकारी थी। गुरुवार को जिले के ज्यादातर स्कूलों में दूध पिलाया गया।
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