मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का कहना है कि बिजली दरें बढ़ाना सरकार की मजबूरी है। महंगी बिजली खरीदकर लोगों को सस्ती दरों पर आपूर्ति की जा रही है इसलिए दरें बढ़ाने के अलावा कोई विकल्प भी नहीं है।
सरकार की कोशिश है कि बिजली दरों में संतुलन बना रहे ताकि उपभोक्ताओं पर ज्यादा भार न पड़े। जहां तक बिजली दरों के निर्धारण का सवाल है तो यह अधिकार राज्य विद्युत नियामक आयोग को है।
सोमवार को कैबिनेट की बैठक के बाद सचिवालय एनेक्सी में पत्रकारों से रू-ब-रू अखिलेश ने बिजली दरों में बढ़ोतरी के सवाल पर कहा कि यह भी देखा चाहिए कि यूपी के मुकाबले दूसरे राज्यों की बिजली दरें क्या हैं?
पावर कार्पोरेशन भारी घाटे में है इसके बावजूद कोशिश यही है कि बिजली की दरों में संतुलन बनाए रखा जाए। आपूर्ति व्यवस्था दुरुस्त रखने के लिए पावर कार्पोरेशन को महंगी बिजली खरीदनी पड़ रही है।
इसके बावजूद प्रयास यही है कि आम जनता पर ज्यादा बोझ न पड़े। अभी नियामक आयोग को दरों का प्रस्ताव सौंपा गया है। बिजली दरें तय करने का काम आयोग का है। आयोग की मंजूरी मिलने के बाद ही दरें बढ़ेंगी
सूचना आयुक्तों की नियुक्ति में अड़चन
राज्य सूचना आयोग में सूचना आयुक्तों की नियुक्ति के सवाल पर अखिलेश ने कहा कि सरकार ने तो इस बारे में फैसला कर लिया था और नाम भी भेज दिए गए हैं लेकिन इसमें कुछ अड़चनें हैं जिसके कारण नियुक्ति नहीं हो पा रही है। इन अड़चनों को जल्द दूर कराने की कोशिश की जा रही है।
आप हमारा ख्याल रखें हम आपका रखेंगे
राजधानी के संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (एसजीपीजीआई) में पत्रकारों के नि: शुल्क इलाज के कैबिनेट के फैसले पर मीडिया की ओर से आभार जताए जाने पर मुख्यमंत्री ने चुटकी ली कि आप हमारा ख्याल रखें हम आपका रखेंगे।
मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति के एक पदाधिकारी ने मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त करते हुए जैसे ही कहा कि उम्मीद है कि आगे भी सरकार पत्रकारों के हितों का ध्यान रखेगी, मुख्यमंत्री ने धीमे से एक दूसरे का ध्यान रखने की टिप्पणी की और आगे बढ़ गए।