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सैफई आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय में हुआ जहीर का निशुल्क इलाज

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इटावा। उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय सैफई के हड्डी रोग विभाग के डाक्टरों ने दोनों कूल्हों का सफल प्रत्यारोपण कर जहीर खान (45) को नई जिंदगी दी। इटावा निवासी जहीर पांच-छह वर्षों से दर्द से परेशान थे। तमाम अस्पतालों में दिखाते रहे पर विशेष लाभ नहीं मिला। समय के साथ उनकी तकलीफ बढ़ती रही। एक समय ऐसा आया कि चलना तो दूर उन्हें खड़े होने में भी तकलीफ होने लगी। पिछले तीन वर्षों से तो वे चारपाई पर ही जीवन जीने को मजबूर हो गए थे। जरा सा हिलने पर भी असहनीय पीड़ा होती थी।
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रिश्तेदारों की मदद से उन्हें आगरा व दिल्ली के अस्पतालों में दिखाया गया। वहां डाक्टरों ने उनके दोनों कूल्हों में खराबी बताकर प्रत्यारोपण की सलाह दी। डाक्टरों ने आपरेशन में करीब पांच से सात लाख का खर्च बताया। अत्यंत गरीब होने से वे एक लाचार व विवश जिंदगी जीने को मजबूर थे। उनके रिश्तेदारों को इटावा में रहने वाले अन्य लोगों से जानकारी मिली कि चिकित्सा विश्वविद्यालय सैफई के हड्डी रोग विभाग में इस प्रकार के रोगों का सफल इलाज लगभग नि:शुल्क या कम खर्च में किया जाता है। इसके बाद जहीर को हड्डी रोग विभाग में भर्ती किया गया।
चार घंटे चले इस आपरेशन में हड्डी रोग विशेषज्ञों एवं प्रोफेसर डा. सुनील कुमार एवं उनकी टीम जिसमें डा. हरीश कुमार, डा. प्रशांत प्रताप सिंह, डा. राजकुमार, डा. जय यादव व ओटी स्टाफ ने जहीर के दोनों कूल्हों का सफल प्रत्यारोपण किया। अगले कुछ दिनों की कसरत और देखभाल से मरीज के मांसपेशियों में जान आ गई। वे अपने पैरों पर खड़े होने लगे। 15 दिनों बाद डिस्चार्ज होकर जहीर एक नई जिंदगी की शुरूआत के सपने को साकार करते हुए अपने पैरों से चलते हुए घर गए।
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डा. सुनील कुमार ने बताया कि विभिन्न कारणों से कूल्हे खराब हो सकते हैं। दर्द के साथ जोड़ों में स्थायी विकार आ जाता है। इससे मरीज पैर पर वजन देने में असमर्थ हो जाता है। दर्द निवारक दवाइयां भी बेअसर हो जाती हैं। ऐसे में कूल्हा प्रत्यारोपण ही एकमात्र सफल उपाय होता है। प्रत्यारोपण के दौरान खराब जोड़ों की सतहों को बदल दिया जाता है। इससे कि उसमें दर्द होने और वजन न लेने की समस्या बिल्कुल ही खत्म हो जाती है। चिकित्सा अधीक्षक डा. आदेश कुमार ने बताया कि सैफई विश्वविद्यालय में जहीर का इलाज लगभग नि:शुल्क किया गया। गरीबी रेखा से नीचे होने के कारण सारी जांचें एवं आपरेशन प्रक्रिया का कोई शुल्क नहीं लगा। मरीज को न तो अब कूल्हों में दर्द है और न ही चलने फिरने में कोई समस्या है।
कुलपति प्रो. डा. राजकुमार ने बताया कि विश्वविद्यालय के हड्डी रोग विभाग में स्थापित कूल्हा एवं घुटना प्रत्यारोपण केन्द्र में काफी समय से प्रदेश व निकटवर्ती राज्यों के मरीज नि:शुल्क या बहुत ही कम खर्चे में सफल इलाज करा रहे हैं।
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