लॉकडाउन में फैक्टरियां बंद होने से यमुना का पानी साफ हो गया है, नदी के आसपास पक्षियों की संख्या भी
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इटावा। लॉकडाउन में दिल्ली समेत अन्य शहरों की फैक्टरियां बंद होने से शहर में यमुना का जल एकदम साफ हो गया है। पानी अब आचमन लायक हो गया है। यमुना नदी के किनारे दुर्लभ पक्षी भी दिखाइ पड़ रहे हैं।
उत्तराखंड में यमुनोत्री ग्लेशियर से यमुना नदी निकलती है। दिल्ली, मथुरा, आगरा, इटावा होते हुए यमुना करीब 1400 किलोमीटर का लंबा सफर तय करने के बाद प्रयाग में जाकर संगम में मिलती है। अपनी इस यात्रा में यमुना जी लाखाें लोगाें को जरूरत के अनुसार पानी देती हैं। यात्रा के दौरान कई शहरों की गंदगी, औद्योगिक प्रतिष्ठानों से निकलने वाला कचड़ा यमुना में मिलकर जल को प्रदूषित करता है। इस वजह से यमुना में प्रदूषण की मात्रा काफी बढ़ गई थी।
इस बारे में पर्यावरण संस्था सोसायटी फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर के सचिव डॉ. राजीव चौहान का कहना है कि यमुना नदी सबसे प्रदूषित नदियों में से एक है। औद्योगिक कचरे की वजह से यमुना नदी नाले के रूप में नजर आती है। जो विभिन्न प्रकार की बीमारियों की वजह भी बन रही है। यमुना को साफ करने के लिए जो काम यमुना एक्शन प्लान नहीं कर सका उसे लॉकडाउन ने कर दिखाया। अब यमुना नदी की सूरत काफी बदल चुकी है। स्वच्छ होने की वजह से नदी के पास दुर्लभ पक्षी भी नजर आ रहे हैं। इनमें ब्लेक नेक्ड स्टार्क, वूली नेक्ड स्टार्क, पेंटिंड स्टार्क, स्कवेजर वल्चर, डारटर, लिटिल रिंग फ्लोवर आदि हैं।