महिलाओं को गांव में ही रोजगार उपलब्ध कराकर आत्मनिर्भर बनाने के स्वयं सहायता समूहों को सशक्त बनाया जा रहा है।
राष्ट्रीय आजीविका मिशन ने इस दिशा में एक और कदम बढ़ाया है। नई योजना में अब स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को पशुपालन से जोड़ा जाएगा।
महिलाएं डेयरी खोलेंगी और दूध की बिक्री से आय जुटाकर आत्मनिर्भर बनेगी। योजना को धरातल पर उतारने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।
लॉकडाउन के दौर में स्वयं सहायता समूह काफी उपयोगी साबित हो रहे हैं। अब यह योजना है कि स्वयं सहायता समूह की महिलाएं अपने गांवों में ही गाय भैंस पालेंगी। इनके दूध की बिक्री की जाएगी जिससे समूह को आय होगी।
समूह से जुड़ीं महिलाएं आत्मनिर्भर बनेंगी। ज्यादातर गांवों में पहले ही स्वयं सहायता समूहों का गठन किया जा चुका है और वे सक्रिय भी हैं। समूहों को दूध की बिक्री में कोई परेशानी न हो इसका इंतजाम भी पहले ही किया जा रहा है।
इसे लेकर एनआरएलएम व अमूल डेयरी के अधिकारियों के बीच बातचीत हो रही है ताकि समूहों की डेयरियों दूध वे खरीद लें। इससे समूहों को दूध की बिक्री के लिए परेशान नहीं होना पड़ेगा।
इसे लेकर अमूल डेयरी के अधिकारियों ने कुछ गांवों का दौरा भी किया है। हालांकि कोरोना काल के चलते गति कुछ धीमी जरूर है, लेकिन जल्द ही इस योजना को धरातल पर उतारा जाएगा। खास बात यह है कि इससे गो पालन के साथ ही गायों के संरक्षण को भी प्रोत्साहन मिलेगा।
महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के सभी प्रयास किए जा रहे हैं। इसके लिए पशुपालन किया जाएगा और फिर दूध की बिक्री की जाएगी इससे स्वयं सहायता समूहोें को आमदनी भी बढ़ जाएगी। इस संबंध मे डेयरी से भी बातचीत हो रही है।
- डा. राजा गणपति आर, सीडीओ