किसान किशोरी लाल का फाइल फोटो।
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इटावा। महेवा ब्लॉक क्षेत्र के बराउख गांव में छुट्टा गोवंशों से फसल बचाने के लिए खेत की रखवाली करने गए किसान की ठंड लगाने से मौत हो गई। लेखपाल और कानूनगो ने पंचनामा भरकर शव को सौंप दिया। खेत में ठंड लगने से किसान की ये तीसरी मौत है। इसके पहले बसरेहर और निवाड़ीकला में एक-एक किसान की मौत हो चुकी है।
बराउख गांव निवासी किसान बनवारी लाल दोहरे के पास आठ बीघा जमीन है। उनका मझला बेटा किशोरीलाल (50) इस जमीन पर खेतीबाड़ी करता था। बड़ा बेटा अर्जुन और छोटा सुधीर बाहर नौकरी करते हैं। किशोरी लाल के बड़े बेटे सतेंद्र ने बताया कि खेतों में गेहूं और सरसों की फसल बोई है। छुट्टा गोवंशों से फसलों की रखवाली के लिए पिता रोज रात में खेतों पर रुकते थे। मंगलवार रात को भी वह खेतों पर गए थे। वहां उन्हें ठंड लग गई। इससे रात करीब एक बजे घर लौट आए, वे कांप रहे थे। अलाव जलाकर उन्हें तपाया लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। परिवार के लोग कुछ समझ पाते इसी बीच उनकी मौत हो गई। प्रधान आशुतोष दुबे ने लेखपाल को सूचना दी। इस पर लेखपाल सलीम और कानूनगो गांव पहुंचे। परिवार के लोगों ने पोस्टमार्टम कराने से मना कर दिया। इस पर कानूनगो ने पंचनामा भरवाकर शव परिवार के लोगों को सौंप दिया। किशोरीलाल के परिवार में पत्नी शीतल के अलावा चार बेटे सतेंद्र, नरेंद्र, प्रवेंद्र, शिवम और दो बेटियां हैं। बेटियों की शादी हो चुकी है।
सोमवार को निवाड़ीकला में किसान संतोष कठेरिया की खेत पर ठंड लगने से मौत हो गई थी। वे भी गोवंश से फसल की रखवाली करने खेत पर गया था। संतोष भी पिता जयराम की पांच बीघा पर खेती करता था।
इसके पहले चौबिया थाना क्षेत्र के राहिन गांव निवासी 38 वर्षीय किसान प्रहलाद सिंह की खेत मेें ठंड लगने से मौत हो गई थी। प्रहलाद भी छुट्टा गोवंश से फसल की रखवाली करने खेत पर गया था। अमर उजाला ने 19 दिसंबर के अंक में छुट्टा गोवंश से फसलों को बचाने के लिए ठंड में रातें बिताने की खबर प्रकाशित की थी।