इटावा। पहाड़ों पर हो रही बर्फबारी का खासा असर जनपद में देखने को मिल रहा है। मंगलवार को दोपहर एक बजे तक धूप न निकलने और पारा के सात डिग्री होने की वजह से लोगों की गर्म कपड़े पहनने के बावजूद कंपकंपी छूट रही।
लोग आग जलाकर हाथ सेंकते रहे। हाड़ कंपाने वाली सर्दी पड़ने के बावजूद नगर में स्कूल-कॉलेज खुले रहे। हालांकि ज्यादातर परिषदीय स्कूलों में बच्चे आए ही नहीं। कुछ स्कूलों में इक्का दुक्का बच्चे आए लेकिन उन्हें शिक्षकों ने वापस भेज दिया।
सिविल लाइन स्थित प्राथमिक विद्यालय की प्रधानाध्यापिका शकीला बानो ने बताया कि पंजीकृत बच्चो की संख्या 52 है। सर्दी की वजह से कई बच्चे आए लेकिन सर्दी की वजह से उन्हें वापस कर दिया। इसी प्रकार बलराम सिंह चौराहा स्थित प्राथमिक विद्यालय की प्रधानाध्यापिका शमीम अजीज ने बताया कि विद्यालय में 72 बच्चे पंजीकृत हैं। सर्दी की वजह से ज्यादातर बच्चे स्कूल नहीं आए। हालांकि कुछ बच्चे आए उन्हें वापस कर दिया।
इधर, जिला अस्पताल में भी मरीजों पर ठंड का असर घटती संख्या को देखते हुए लगाया जा सकता है। मंगलवार को 950 मरीज आए, हालत यह रही कि दोपहर एक बजे के बाद डॉक्टरों के कक्ष के बाहर सन्नाटा पसरा हुआ था। मरीजों को न पर्चा बनवाने और न डाक्टरों के पास दिखाने में ज्यादा समय लगा। लिहाजा दवा लेकर जल्दी चले गए।
इनसेट
जिला अस्पताल की छाती रोग विशेषज्ञ डॉ. ऋचा चौधरी का कहना है कि सर्दी से सांस के रोगियों की संख्या बढ़ गई है। रोजाना करीब 60 से 70 मरीज आ रहे हैं। बताया कभी-कभी तो यह संख्या और ज्यादा बढ़ जाती है। 19 दिसंबर को सांस के 248 मरीज आए। बताया कि सांस रोगियों को एलर्जी से दूर रहना चाहिए। खट्टी चीजों का सेवन न करें। धूल, मिट्टी और धुएं से बचें। पुरुष बीड़ी, सिगरेट पीने से बचें। ज्यादा दिक्कत होने पर चिकित्सक के पास जरूर जाएं।
महेवा संवाद प्रतिनिधि के अनुसार मंगलवार को कड़ाके की सर्दी के बावजूद स्कूल कॉलेज खुले तो जरूर लेकिन प्राथमिक, उच्च प्राथमिक व इंटर कॉलेजों में छात्र -छात्राएं बेहद कम संख्या में पहुंचे। उझियानी परिषदीय स्कूल के प्रधानाध्यापक नरेंद्र यादव ने बताया कि बच्चे बहुत कम संख्या में आए। पंजीकृत 102 में से 20 ही मौजूद रहे। प्राथमिक स्कूल महेवा में भी115 में से 35 बच्चे आए। लोकमान्य रूरल इंटर कॉलेज में भी छात्रों की संख्या कम रही।