रोजी रोटी कमाने के लिए घर बार छोड़ कर गए प्रवासी देश में दो माह से लॉकडाउन होने की वजह से रोजाना बड़ी संख्या में ट्रेनों से लौट रहे हैं।
परेशानी झेलने के बाद एक ओर उन्हें अपनों से मिलने की छटपटाहट है तो क्वारंटीन किए जाने का डर सता रहा कि इस वजह से 14 दिन तक अपनों से दूर भी रहना पड़ सकता है।
जम्मू- कश्मीर के कटरा में पुत्र हैदर के साथ रेवाड़ी बेचने वाले बदायूं निवासी इसरार ने बताया वह 10 साल से कटरा में रेवड़ी बेच रहा है। कोरोना महामारी की वजह से काफी दिक्कतें हुईं।
लॉकडाउन खुलने के बाद वापस जाने के सवाल पर कहा कि इस बारे में अभी कुछ नहीं सोचा है। औरैया जनपद के बिधूना निवासी नीरज ने बताया कि उसका तो कटरा जाना ही बेकार रहा।
हालात इस कदर बदतर हो जाएंगे कि कमाने और खाने तक के लाले पड़ जाएंगे। बताया वे एक मार्च को कटरा गया था। एक निजी कंपनी में काम लगा ही था कि पहले 22 मार्च को जनता कर्फ्यू और दो दिन बाद 25 मार्च से लॉकडाउन होने से कामकाज सब बंद हो गया।
पंजाब के लुधियाना से लौटे अनंजय कुमार ने बताया वह कन्नौज जनपद का निवासी है। करीब 6 साल से लुधियाना में कपड़े की फैक्टरी में पैकिंग इंचार्ज था। 25 हजार रुपये मिलते थे। शादी नहीं हुई है आराम से गुजर बसर हो रही थी। घर पर मां और पिता रहते हैं।
कहा यदि कनौज में काम मिल जाएगा तो नहीं जाने की सोचेंगे। फिलहाल इस साल के अंत तक तो जाने के बारे में नहीं सोचेंगे। बताया कि उसने लुधियाना में अपना सुनहरा भविष्य देख था और अपने आधार कार्ड में पता भी लुधियाना का दर्ज करवा लिया था।
लुधियाना शहर की गलियों में करीब 8 साल से घूम-घूम कर सब्जी बेचने वाले कन्नौज जनपद के शेर सिंह ने बताया कि वह परिवार के साथ रह रहा था। कहा कि उसे कोई दिक्कत नहीं थी,
लेकिन लॉकडाउन की वजह से सभी काम धंधा बंद होने से ज्यादातर लोग सब्जी बेचने लग गए थे। इस वजह से सब्जी बेचने का काम भी ठप से हो गया था। बताया अभी से सोच लिया है कि मार्च से पहले लुधियाना नहीं जाएंगे।