छह दिन पूर्व बिगड़े मौसम में बुधवार को भी सुधार नहीं आया और भोर से ही सड़कों पर घना कोहरा छा गया। कोहरा इतना घना था कि सड़क पर पीली लाइटें जलाकर चल रहे वाहन चालकों क ो भी करीब तक का नहीं दिख रहा था। यही कारण रहा कि सड़क पर वाहन रेंगते रहे। बुधवार को भी पारा 7 डिग्री सेल्सियस पर अटका रहा और दृष्टता मात्र 10 मीटर ही मापी गई।
बुधवार को एक दिन पूर्व शुरू हुई बारिश तो नहीं हुई लेकिन बारिश के बाद सर्दी और गलन बढ़ गई। आलम यह रहा कि भोर जब नींद से उठे तो सड़कों पर चारो ओर सिर्फ कोहरे की सफेद चादर ही नजर आ रही थी।
इस गलन भरी सर्दी में देर सुबह तक लोग घरों में ही घुसे रहे अगर कोई दिख रहा था तो वह बस स्कूली बच्चे थे जो पीठ पर बस्ता लादे कोहरे क ो चीरते हुए स्कूल जा रहे थे। इनमें से कुछ तो रिक्सा, वैन आदि वाहनों पर थे तो कुछ साइकिल और पैदल ही स्कूल जा रहे थे। गलन भरी सर्दी का कहर सिर्फ सुबह के समय ही नहीं रहा बल्कि पूरे दिन लोग सूर्य के दर्शन को तरसते रहे।
सुबह से शाम तक दिन में एक मिनट के लिए भी सूर्य की किरणों ने धरती को नहीं छुआ। यही कारण था कि दिन के समय भी लोग सर्दी से ठिठुरते रहे और आम जनजीवन बुरी तरह से प्रभावित रहा।शाम होते होते स्थिति और बिगड़ने लगी और दिन ढलने के साथ ही बढ़ती गलन ने लोगों क ो बेहाल कर दिया।
बढ़ी सर्दी का प्रभाव बाजार में भी दिखाई दिया और बाजार की ज्यादातर दुकाने प्रतिदिन की अपेछा पहले ही बंद हो गईं। सर्दी के चलते रात जल्द ही बाजार में सन्नाटा छा गया और कोहरे ने एक बार फिर शहर को अपने आगोश में ले लिया।ऐसे में सबसे ज्यादा बेहाल गरीब तबका रहा और भीख मांगकर गुजर बसर करने वाले व रिक्सा चालक नगरपालिका के द्वारा लगाए गए अलाव के सहारे रात गुजारते देखे गए।
बुधवार को भी कोहरे के चलते ट्रेनों की लेट लतीफी जारी रही और अप कानपुर-नई दिल्ली शताब्दी 6 घंटे, मगध 8 घंटे, तूफान मेल 5 घंटे, गोमती एक्सप्रेस 2 घंटे, पैसेंजर 3 घंटे की देरी से चलीं।
वहीं कालका मेल, नार्थ ईस्ट व महानन्दा नए सेडयूल के अनुसार रद्द रहीं। वहीं डाउन ट्रेक पर इंटरसिटी एक्सप्रेस व तूफान मेल रद्द रहीं जबकि महानन्दा 4 घंटे, मुरी 3 घंटे, नार्थ ईस्ट 2 घंटे व कालका मेल 2 घंटे की देरी से चलीं।