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बरसात ने बदला मौसम का मिजाज

Thu, 22 Jan 2015 11:44 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, इटावा
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बुधवार की रात से शुरू हुई रिमझिम बरसात और कहीं-कहीं पर ओलों की बौछार ने मौसम का मिजाज बदल दिया है। कड़ाके की ठंड के कारण जनजीवन अस्तव्यस्त हो गया है। सर्द हवाएं गर्म कपड़ों में लिपटे रहने के बाद भी कांपने के लिए मजबूर करती रही थीं। रिमझिम बरसात होने के कारण सार्वजनिक स्थानों पर दिनभर सन्नाटा पसरा रहा। बारिश के कारण न्यूनतम तापमान 5 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया जबकि अधिकतम तापमान 17.6 डिग्री रिकार्ड किया गया।
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कई दिनों के बाद बुधवार को धूप खिली थी, लेकिन रात 12 बजे के बाद आसमान में बादल घिर आए और रिमझिम बरसात शुरू हो गई। रात के वक्त शहर के साथ कुछ स्थानों पर ओलों की बौछार भी हुई। सुबह 8 से 11 बजे तक हल्की बूंदाबांदी होती रही।

दोपहर 12 बजे के बाद झमाझम बरसात शुरू हो गई और देर शाम तक होती रही। बेमौसम बरसात से मौसम का मिजाज बिगड़ गया। सर्द हवाओं के कारण लोगों का बुरा हाल रहा। गर्म कपड़ों में लिपटे रहने के बाद सर्दी ने लोगों को कंपकंपाने के लिए मजबूर कर दिया।
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बस स्टैंड, चौराहों के अलावा सड़कों पर भी बरसात के कारण सन्नाटा पसरा रहा। बरसात होने के कारण शहर के कई मोहल्लों में कीचड़ के कारण आवागमन कठिन हो गया। माल गोदाम रोड, गुरु तेगबहादुर पुल के नीचे जलभराव तथा कीचड़ हो जाने से फिसलन हो गई।

लोगों को निकलने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। उधर, लाइनपार क्षेत्र में जलनिकासी की व्यवस्था न होने के कारण कई मोहल्लों की गलियों में पानी भरा रहा। रामनगर तलैया के पास कई घरों के सामने पानी भरा है। बेमौसम बरसात से कई फसलों को फायदा हुआ तो कुछ में नुकसान की आशंका है।

सरसों की फसल में लस्सी का रोग लग सकता है। वहीं गेहूं, अरहर, चना, मटर, प्याज तथा अन्य रवी की फसलों के लिए यह पानी फायदेमद हो सकता है। चना तथा अरहर की फसल को तो पानी सिंचाई की आवश्यकता ही नहीं होगी। सब्जियों की फसलों के लिए भी वर्षा फायदेमंद साबित होगी, लेकिन रात के समय यदि और वर्षा होती है तो गेहूं छोड़ अन्य फसलों के लिए नुकसानदेह हो सकती है।

पानी भरा तो सड़ जाएगा आलू
बरसात होने के कारण खेतों में पानी भरा हुआ है। इससे आलू के सड़ने की आशंका बन गई है। कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को सलाह दी है कि वे आलू के खेत में पानी भरा न रहने दें। यथासंभव खेत से पानी को निकाल देें। इसके अलावा पानी बरस जाने से बीज की क्वालिटी भी प्रभावित हो जाएगी। आलू का उपयोग बीज के रूप में नहीं किया जा सकेगा। आसमान में बादल छाए रहने से झुलसा जैसे रोग भी फसल को प्रभावित करेगा।
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