मुसीबत से जूझ रहे किसानों की समस्याओं को प्रदेश सरकार ने सीधे वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए सुना। बुधवार को एनआईसी के कांफ्रेंस हॉल में जिले के हरेक ब्लाक से बुलाए गए किसानों को कृषि वैज्ञानिकों की तकनीकी राय से वाकिफ कराया गया।
मुख्य सचिव आलोक रंजन, प्रमुख सचिव अमित मोहन एवं कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों की समस्याओं को सुनकर उनके जवाब दिए। इस राज्य स्तरीय परिचर्चा में अंत में लखनऊ से मुख्यमंत्री अखिलेश सिंह यादव ने इटावा व कन्नौज के एक-एक किसान की समस्या सुनी।
सरकार से यह सीधा संवाद सुबह करीब 10:30 बजे शुरू हुआ। पहले लखनऊ से कृषि वैज्ञानिकों ने जैविक खेती, मृदा परीक्षण और कम समय एवं इस बार हल्के मानसून को देखते हुए फसलों की पैदावार लेने की सलाह दी। मुख्य सांइटिस्ट विनय कुमार मिश्रा ने मृदा परीक्षण को अत्यधिक महत्वपूर्ण बताया।
डा. तपेंदर कुमार, डा. महक सिंह ने तिलहन फसल एवं जमीन में जैविक पदार्थ की मात्रा बढ़ाने के उपाय सुझाए। इसके बाद मंडलवार हरेक जिले से एक किसान को समस्या रखने का मौका दिया गया। इटावा जिले से लीटेपुरा के किसान श्रीपति मिश्र ने गत वर्ष के अवशेष धान के बीज से होने वाले नुकसान की बात कही।
इस पर कृषि वैज्ञानिक वीएन सिंह ने सुझाव दिया कि अगली फसल लेने से पूर्व सिंचाई कर लें। मिट्टी को उलट-पलट लें। उन्होंने संकर धान की पैदावार लेने की सलाह दी। बताया कि इस धान में सूखा बर्दाश्त करने की क्षमता होती है। इसके अलावा कन्नौज से महेंद्र सिंह कटियार ने कहा कि उनके क्षेत्र में आलू की सर्वाधिक पैदावारी होती है।
लिहाजा आलू की भी सरकारी खरीद की जाए। इस पर प्रमुख सचिव अमित मोहन ने कहा कि किसानों की बात नोट की जा रही है। विचार-विमर्श कर निर्णय लिया जाएगा। वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए विभिन्न जिलों से किसानों ने धान के अच्छे रेट दिए जाने और जो पुराना धान भरा पड़ा है। उसे बेचने की व्यवस्था कराने के लिए कहा।
किसानों ने फसल बीमा और मुआवजा के भी सवाल उठाए। कहा गया कि फसल ज्यादा खराब हुई और मुआवजा कम मिला। इसी तरह बीमा के तहत प्रीमियम तो सौ फीसदी काट लिया गया, लेकिन बीमा क्लेम 15 फीसदी ही दिया गया है। सिंचाई के पर्याप्त साधन न होने की शिकायत की। मृदा परीक्षण मुफ्त कराए जाने की मांग की।
फसल लेने से पूर्व गन्ना का मूल्य निर्धारित किए जाने को कहा। सिंचाई के प्लास्टिक पाइप पर अनुदान बढ़ाए जाने की मांग की गई। किसानों ने अधिकारियों के स्तर से सुनवाई न होने की शिकायत भी की।
इस सब समस्याओं और शिकायतों को सुनने पर प्रमुख सचिव श्री मोहन ने आश्वस्त किया कि शासन इन पर गंभीरता से विचार करेगा।
लखनऊ से इस परिचर्चा में कृषि राज्य मंत्री आरके सिंह, मंत्री/प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी, मुख्यमंत्री के सलाहकार रमेश यादव और जिले से डीएम नितिन बंसल, सीडीओ डा. अशोक चंद्र, एडीएम ज्ञानेंद्र सिंह, डीडी कृषि एसके सिंह, डिप्टी आरएमओ आरएन पाल, डीएचओ विनोद यादव के अलावा जिला स्तरीय कृषक सलाहकार समिति के किसान महेश बाबू, रघुवीर नारायण यादव, सत्यराम यादव, सत्यवती समेत कुल 12 किसान शामिल रहे।
खेती ठीक हो तो बेरोजगारी दूर हो जाएगी-अखिलेश
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा कि दैवीय आपदा का सर्वाधिक असर किसान पर पड़ता है। गेहूं की कीमतों को लेकर मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार जो तय करती है, वह किसानों को मिल जाए, यह सबसे बड़ी उपलब्धि होगी। उन्होंने कहा कि बेमौसम बारिश की वजह से जितना उत्पादन होना चाहिए था, वह नहीं हो पाया इसलिए कृषि विभाग, वैज्ञानिकों और सरकार को एक साथ जागरूक होकर काम करना होगा।
वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए किसानों को संबोधित करते हुए सीएम श्री यादव ने कहा कि साइंटिस्ट एवं कृषि एक्सपर्ट यदि यूपी के किसानों की मदद करना चाहते हैं तो हम उन्हें जिला, तहसील या ब्लाकों को एडॉप्ट करने के लिए दे दें। इसके लिए उन्हें सभी सुविधाएं मुहैया कराई जाएं। इसके लिए एग्रीकल्चर के एक्सपर्ट लोगों से बात कर ली जाए।
उन्होंने कहा कि विदेशों में किसान इसी वजह से अच्छा लाभ प्राप्त कर लेते हैं क्योंकि वहां ऐसा मैकेनिज्म बना हुआ है कि सरकार, बाजार और साइंटिस्ट मिलकर काम करते हैं। प्रदेश सरकार ने भी एक्सप्रेस वे पर मंडियां बनाने का निर्णय लिया है। इससे यहां कारोबारी किसानों से सीधा संपर्क कर सकेंगे। कन्नौज में आलू मंडी से इसकी शुरुआत कर रहे हैं।
इसके लिए पैसा भी उपलब्ध हो चुका है। उन्होंने कहा कि कई बीज में शिकायत आती है कि वह उगा ही नहीं। श्री यादव ने कहा कि आज उन्होंने वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए बात की है। आगे जमीन पर पहुंच कर बात करेंगे। जो समस्याएं किसानों ने रखी हैं, उनका समाधान किया जाएगा।