इटावा। जिला अस्पताल परिसर में बने कोविड-19 अस्पताल में
वेंटिलेटर मंगलवार शाम तक चालू नहीं हो पाए। वेंटिलेटर चलाने के लिए आउटसोर्सिंग से तीन तकनीशियन रखे गए, दोपहर तक तीनों ने ड्यूटी की और बिना बताए चले गए। अपना मोबाइल फोन भी बंद कर दिया है।
जिला अस्पताल के एक कमरे में पांच वर्ष से 18 वेंटिलेटर बंद रखे थे। कोरोना महामारी के दौरान मरीजों की मौत होने पर अमर उजाला ने कमरे में बंद रखे वेंटिलेटर की खबर प्रकाशित की तो अधिकारी हरकत में आए। अधिकारियों ने जल्द से जल्द वेंटिलेटर चालू करवाने का दावा किया। इसी बीच सीएमओ का तबादला हो गया। नए सीएमओ डॉ. भगवान दास ने चार्ज लेने के बाद पांच मई को दावा किया कि 24 घंटे में वेंटिलेटर चालू करवा दिए जाएंगे।
तकनीशियन आउट सोर्सिंग से रखने के लिए विज्ञापन भी निकाला गया। वेंटिलेटरों गोदाम से निकालकर कोविड अस्पताल में बेडों के पास रखवा दिए गए। अभी बिजली का कनेक्शन देने का काम चल रहा है। वेंटिलवेटरों के संचालन के लिए आउट सोर्सिंग से तीन ऑपरेट के सोमवार को इंटरव्यू हुए। मंगलवार सुबह तीनों ने ज्वाइन कर लिया। दोपहर बाद तीनों आपरेटर बिना बताए चले गए।
सीएमओ ने अस्पताल पहुंचकर ऑपरेटरों के बारे में सीएमएस डॉ. अशोक कुमार से पूछा लेकिन वह जानकारी नहीं दे सके। सीएमओ के कहने पर कर्मचारियों ने ऑपरेटरों का मोबाइल मिलवाया, लेकिन वह स्विच ऑफ बताता रहा। तकनीशियन न होने से वेंटिलेटर फिलहाल चालू होने की उम्मीद नहीं दिख रही है।
सत्ताधारी नेता की सिफारिश पर रखे गए ऑपरेटर
स्वास्थ्य विभाग में चर्चा है कि अस्पताल में सत्ताधारी दल के एक नेता की संस्तुति पर कर्मचारियों की नियुक्ति की जा रही है। वेंटिलेटर ऑपरेटर भी नेताजी के कहने पर रखे गए।
कोरोना अस्पताल में वेंटिलेटर लगाने का काम चल रहा है। जल्द ही इन वेंटिलेटरों को चालू करा दिया जाएगा, ताकि मरीजों को फायदा मिल सके। डॉ. भगवान दास, सीएमओ