बलरई थाना क्षेत्र के नगला विशुन की थार गांव में हुई महिला की हत्या में मौजूदा हालात को लोग जिम्मेदार ठहरा रहे हैं।
लॉकडाउन में काम बंद हुआ तो हत्यारोपी पति के शराब पीने का खर्च पूरा होना मुश्किल हो गया। पाई-पाई का मोहताज होने के बाद उसने ससुराल की जमीन बेचने का प्रयास किया। विरोध करने पर आपा खोकर पत्नी को ही मार डाला।
ग्रामीणों के मुताबिक हत्यारोपी रामबाबू की करीब 18 साल पहले मालती से शादी हुई थी। शराब का लती रामबाबू शादी के कुछ महीने बाद ही अपने पैतृक गांव की जमीन बेचकर पत्नी के साथ ससुराल में आ बसा।
परिवार का खर्च चलाने के लिए उसने घर छोड़ा और जोधपुर की एक कपड़ा मिल में नौकरी करने लगा। गांव वालों का कहना है कि शराब पीने को लेकर पति-पत्नी में अक्सर विवाद होता था, लेकिन रामबाबू कभी इतना हिंसक नहीं हुआ।
इस बीच लॉकडाउन में 21 मार्च को वह लौटा तो कमाई के रुपये थोड़े दिन में खर्च हो गए। परिवार के लिए दाल रोटी का इंतजाम करने के साथ उसे अपने शराब के लिए हर रोज इधर-उधर से व्यवस्था करनी पड़ती थी।
गांव के ज्यादातर लोग तंगहाली में जी रहे, इसलिए उससे किसी उधार मिलने की भी उम्मीद नहीं थी। कोई उपाय न सूझा तो उसकी निगाह ससुर के चार बीघा जमीन पर टिक गई।
जमीन को वह पत्नी के नाम करवाने के लिए ससुराल वालों पर दबाव बनाने लगा। इस बीच उसने जमीन का सौदा भी कर डाला, लेकिन ससुर ने जमीन बेटी के नाम नहीं की। इससे तिलमिलाए रामबाबू सिर पर खून सवार हो गया और गुरुवार तड़के गंडासे गर्दन रेतकर पत्नी मालती को मार डाला।
गांव वालों का कहना है कि मालती के पिता और भाई मजदूरी करके किसी तरह परिवार का पेट पाल रहे हैं। मालती के पांच बच्चे है। सबसे बड़ा पुत्र सोनू (13), पुत्री मोहनी (9), पुत्री प्रियंका (6), पुत्री रेनू (3) वर्ष, तथा एक 5 महीने का पुत्र है।
मालती लोगों के घरों में काम करके किसी तरह बच्चों की परवरिश कर रही थी। रामबाबू को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया और बच्चों के सिर से मां का साया भी उठ गया। ननिहाल की तंगहाली में अब बच्चों का पेट भरना भी मुश्किल हो गया है।