ट्रेनों की लेटलतीफी और रेलवे कर्मचारियों की कार्यशैली से गुस्साए यात्रियों ने सोमवार को स्टेशन पर जमकर हंगामा किया। अफसर बमुश्किल यात्रियों को शांत करा पाए। ट्रेनों की लेटलतीफी का आलम यह रहा कि दिल्ली के लिए प्रमुख मानी जाने वाले गोमती एक्सप्रेस चार घंटा एवं पैसेंजर लगभग पांच घंटा देरी से आई। इस बीच भीषण गर्मी में यात्री बिलबिला उठे।
गोमती एक्सप्रेस से लेकर पैसेंजर ट्रेन के यात्रियों से सोमवार को रेलवे स्टेशन खचाखच भरा था। लगातार ट्रेनों का टाइम बढ़ रहा था। दोनों ही ट्रेनों के लगातार लेट होने एवं पूछताछ खिड़की पर सही लोकेशन न मिलने से परेशान यात्रियों ने पूर्वाह्न करीब 11:30 बजे पूछताछ खिड़की के बाहर हंगामा शुरू कर दिया।
शोरगुल सुनकर रेलवे अफसर सहित आरपीएफ के जवान मौके पर पहुंचे और यात्रियों को समझाने का प्रयास किया। यात्रियों में नाराजगी इस बात की थी कि एक बार में ही बता दिया जाता कि ट्रेन चार घंटे लेट आएगी तो वह इंतजार ही नहीं करते।
उनका कहना था कि पूछताछ खिड़की पर तैनात कर्मचारी भी यात्रियों को कोई जवाब नहीं दे रहा है। आरपीएफ और रेलवे अफसरों ने जैसे तैसे यात्रियों को समझा बुझाकर शांत किया। ट्रेनों की लेटलतीफी का आलम यह रहा है कि लखनऊ से नई दिल्ली जाने वाली गोमती एक्सप्रेस अपने निर्धारित समय सुबह 9:40 बजे से करीब चार घंटे देर से पहुंची।
इसके साथ ही कानपुर से आने वाली पैसेंजर ट्रेन निर्धारित समय सुबह 10:25 बजे से करीब पांच घंटा देर से इटावा स्टेशन पर पहुंची। इसके साथ ही दिल्ली की ओर जाने वाली मगध एक्सप्रेस नौ घंटे, तूफान एक्सप्रेस चार घंटा, नार्थ ईस्ट एक्सप्रेस तीन घंटे देर से आई।
ट्रेनों की लेटलतीफी से परेशान यात्री छाया की तलाश में प्लेटफार्म नंबर के कबर्ड हिस्से के साथ ही वेटिंग हाल में जमा हो गए। धीरे-धीरे ट्रेनों की लेटलतीफी बढ़ती गई तो यात्री भी गर्मी से बेहाल होते गए। भीड़ अधिक होने से स्टेशन पर ठंडे पानी की भी किल्लत हो गई।
पेयजल किल्लत और गर्म हवाओं के थपेड़ों ने यात्रियों का गुस्सा और भड़का दिया। स्टेशन अधीक्षक आरके त्रिपाठी ने बताया कि हंगामे की कोई जानकारी नहीं है। ट्रेन पीछे से ही लेट हैं। इसमें स्थानीय स्तर पर कुछ नहीं किया जा सकता।